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सर्दियों में वक्त बिताने के लिए यमुना किनारे पहुंचने लगे हैं पैराग्रीन फाल्कन, कैमरों में कैद हुई कुछ मोहक छवि

कुदरत का करिश्मा या फिर कह लीजिए अजूबा। प्रकृति ने मनुष्य को कई सारे उपहार दिए हैं। जिनमे फल, फूल, पशु, पक्षियों से लेकर अनेक जीव-जंतु भी शामिल है। इन्हीं में कुछ ऐसे भी हैं जो अपनी पक्षधरता से खुद को दूसरों से अलग प्रतीत करवाते हैं।

ऐसे पक्षियों में एक नाम यह भी जिसे दुनिया का सबसे तेज गति से उड़ने वाला पक्षी भी कहा जाता है। इस पक्षी का नाम पैराग्रीन फाल्कन है। यह पक्षी सर्दियों का समय मिटाने के लिए यमुना भी पहुंच चुका है।

हवाओं के साथ अपनी रुक को बदलते हुए वर्ल्ड वाचर समर्थ खन्ना और हेमंत किराला ने इस पक्षी को यमुना किनारे अपने कैमरे में कैद कर हमेशा के लिए यादगार बना लिया है। आपको बता दें कि यह पक्षी यूरोप और एशिया महाद्वीप के बड़े भूभाग पर ही पाया जाता है

जिन्हें दिल्ली एनसीआर के क्षेत्रों में देखना बेहद मुश्किल होता है। कैमरे में इस साल क्या धोने से पहले 2019 में असोला भाटी बर्ड सेंचुरी में इसकी साइटिंग (देखा जाना) हुई थी।

वहीं पक्षी विशेषज्ञ डा. आलोक तिवारी ने बताया कि पैरिग्रीन फाल्कन बाज परिवार का सदस्य है। वही अधिकांश यह मुख्यत: ठंडे देशों में पाया जाता है। जब उन देशों में ठंड हद से ज्यादा बढ़ जाती है तो ये अपेक्षाकृत कम ठंडे देशों की तरफ उड़ान भरते हैं।

इन पक्षियों को खुले मैदानी इलाके, जहां पानी की भी प्रचुरता हो वे क्षेत्र इन्हें पसंद आते हैं। डा. आलोक तिवारी ने बताया कि करीब चार साल पहले गुरुग्राम के गांव धनकोट में इस पक्षी को स्पॉट (देखना) कर चुके हैं।

उन्होंने बताया कि फरीदाबाद और नोएडा के बीच यमुना के दोनों तरफ बड़ा मैदानी क्षेत्र हैं। इसी कारण यह पक्षी यहां पहुंचा। इस पक्षी के उड़ने की रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटा है।

दुनिया में यह किसी पक्षी की मापी गई सबसे अधिक रफ्तार है। यह पक्षी चिड़ियों का शिकार करके खाता है। इसकी खासियत है कि उड़ती चिड़िया को भी पकड़ लेता है।

समर्थ खन्ना का कहना है कि यमुना किनारे इस पक्षी का दिखना सुखद है। किसी क्षेत्र में खाद्य श्रृंखला में सबसे ऊपर के जीवों (शिकारी) की मौजूदगी दर्शाती है कि उक्त क्षेत्र में जैव विविधता कायम है।

पैरिग्रीन फाल्कन भी खाद्य श्रृंखला के सबसे ऊपरी जीवों में शुमार है। उनका कहना है प्रकृति की दृष्टि से यमुना नदी के दोनों तरफ का इलाका वरदान की तरह है। इसे संरक्षित किए जाने की जरूरत है।

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