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बिजली 24 घंटे तो आती नहीं, बंद हुए जनरेटर तो कैसे होगा गुज़ारा

जिले में लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। दिल्ली -एनसीआर में सर्दी की दस्तक के साथ ही प्रदूषण के स्तर में इजाफा होने लगता है। प्रशासन इस पर रोक लगाने के लिए तैयारी तो करती है लेकिन वे नाम के लिए ही साबित होती है। अब पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण के निर्देश पर जिले में 15 अक्तूबर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान लागू करने की तैयार है।

हवाओं में भी प्रदूषण को आज – कल महसूस किया जाने लगा है। जिले में अलग-अलग चरणों में परिस्थितियों के अनुसार निपटा जाएगा। हालांकि, तैयारियां आधी अधूरी हैं ऐसे में यह चुनौती बन सकती है।

ग्रेप के मुताबिक 15 अक्टूबर से डीज़ल जनरेटर को बंद कर दिया जाएगा। लेकिन हर दिन लगने वाले बिजली कट को रोकने के लिए नगर निगम के पास कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। जिले में अनेकों सोसाइटियों में बिजली के नाम जनरेटर की ही सुविधाएं हैं जहां अभी तक कोई फौरी इंतजाम नहीं किए गए हैं। ग्रेटर फरीदाबाद में करीब 20 परिवारों वाली लगभग 40 से अधिक सोसाइटी जनरेटर जैसी अस्थायी बिजली व्यवस्था के भरोसे हैं।

ऐसा तो देखने को मिल सकता है कि यदि ग्रेप सख्ती से लागू होता है तो सोसाइटियों की लिफ्ट, पानी जैसी जरूरी सुविधाएं ठप हो सकती हैं। जिले में 30 हजार छोटे-बड़े उद्योग हैं। बिजली जाने पर 95 फीसदी उद्योग डीजल जनरेटर पर चलते हैं। यहां पर डीजी सेट के विकल्प के तौर पर गैस आधारित जनरेटर हैं, मगर इनकी लागत पांच लाख रुपये से शुरू होकर दो करोड़ तक है। ऐसे में नाम मात्र या बड़े उद्योगों में ही यह जनरेटर मौजूद हैं।

प्रशासन प्रदूषण को रोकने के लिए कड़े प्रयास कर रहा है, ये बात ठीक है लेकिन उसको सब बातों को ध्यान में रख कर जनरेटर पर रोक लगानी चाहिए।सरकार की ओर से शनिवार से ही डीजल जनरेटरों पर पाबंदी लगा दी गई है।

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