Pehchan Faridabad
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स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लगाते निगम के अधिकारी, साफ सफाई के अभाव में धूल फांक रहे कंकरीट के शौचालय

वैसे तो फरीदाबाद का नाम स्मार्ट सिटी के अंतर्गत लिया जाता है, मगर यहां चलाएं गए स्वच्छ भारत अभियान की वास्तविक तस्वीरों का जायजा लिया जाए तो आंखें चौकती रह जाएगी।

दरअसल, स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर निगम द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में तो वहीं बाजारों से लेकर प्रमुख चौक चौराहों से लेकर स्लम क्षेत्रों में शौचालय बनाकर स्थापित कर दिए गए थे। कहीं कंकरीट के शौचालय, तो कहीं प्री-फैब्रीकेटेड शौचालय बनाए गए, मगर देखरेख के अभाव में शौचालयों की मौजूदा हालत खराब है।

कई जगह ताले जड़े हैं। जहां लोगों को शौचालय की जरूरत है दरअसल नगर निगम द्वारा स्थापित किए गए की हालत दयनीय है जिसके चलते लोगों को खुले में शौच जाना पड़ता है और इन बीमारियों का शिकार होना पड़ता है।

शुरआत में जहां निगम द्वारा शौचालय बनाने के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करने के दावे किए गए। इसके बाद भी अब वास्तव में इनकी हालत दयनीय स्थिति में ही है। इनकी देख रेख और साफ सफाई का जिम्मा लेने वाला कोई दूर दूर तक नहीं दिखता।

नगर निगम के रिकार्ड के अनुसार 292 कंकरीट शौचालय हैं, जो एनआइटी, तिगांव, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, बड़खल क्षेत्रों में रखे गए हैं।

क्या कहते है स्वच्छ भारत मिशन के एसडीओ सुरेन्द् खट्टर

स्वच्छ भारत मिशन का कार्यभार देख रहे और निगम के एसडीओ सुरेंद्र खट्टर कहते हैं कि करीब 200 शौचालयों की देखरेख की जिम्मेदारी का काम ठेकेदार के पास है। नगर निगम ने दो वर्ष में इनकी देखरेख के नाम पर करीब 60 लाख रुपये खर्च किए हैं।

बाकी शौचालयों की देखरेख का ठेका अभी दिया जाना है। शौचालयों का निरीक्षण करने के बाद ही ठेकेदार को भुगतान किया जाता है। जिन शौचालयों में व्यवस्था ठीक नहीं है, उनकी देखरेख और मरम्मत का भुगतान नहीं किया जाता है।

मेरे वार्ड की पांच नंबर मार्केट में एक शौचालय पर ताला जड़ा है। दो वर्ष पहले यह शौचालय मार्केट में बनाया गया था। उसी दौरान शौचालय से मोटर और टोटियां चोरी हो गई थीं, तब से बंद पड़ा है। नगर निगम अधिकारी ध्यान नहीं देते

जसवंत सिंह, वार्ड नंबर 14 के पार्षद।

रवि शर्मा, अधीक्षण अभियंता का कहना है कि अधिकांश शौचालय चालू हालत में हैं। लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझने की जरूरत है। सफाई रखें। हम हर शौचालय की बराबर निगरानी रखते हैं। शौचालय का निरीक्षण करने के बाद ही ठेकेदार का भुगतान किया जाता है। वैसे अब हम मार्केट एसोसिएशन और स्वच्छता के क्षेत्र में काम कर रही संस्थाओं से संपर्क कर रहे हैं, जो इन शौचालयों की देखरेख के मामले में नगर निगम का सहयोग करें।

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