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संक्रमण ने छठ पूजा पर लगाया ग्रहण, जाने किस तरह श्रद्धालुओं ने छत से किया छठ मैया पूजा को खुश

प्रतिवर्ष धूमधाम से मनाए जाने वाला पूर्वांचल त्यौहार छठ पूजा अब ना सिर्फ पूर्वांचल बल्कि देश के कोने कोने में धूमधाम से मनाया जाने लगा है। बड़े खेद की बात है कि इस वर्ष वैश्विक महामारी का कहर छठ पूजा पर इस तरह बरपा कि लोग खुशी के साथ इस त्योहार को एक दूसरे के साथ मिल कर मना पाने में असमर्थ साबित हुए।

वही बात करें श्रद्धालुओं की तो उन्होंने इस पूजा को इस वर्ष भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाया और छठ मैया को प्रसन्न करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

फरीदाबाद में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए शासन प्रशासन द्वारा पहले ही महापर्व छठ को न मनाने के लिए घाटों में प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद भी श्रद्धा का भाव इस प्रतिबंध पर कोई प्रभाव नहीं डाल पाया और लोगों ने श्रद्धा के साथ छत पर टब में पानी भरा और उसमें ही गंगा मैया समझकर खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देकर उपासना की।

वैसे तो प्रतिवर्ष छठ मैया को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु छठ घाट पर सैकड़ों की तादाद में पहुंच कर पूजा करते थे। परंतु इस बार ऐसा ना हो सका और लोगों को अर्घ्य देने के लिए घाट पर ना जाकर अपने घर से ही पूजा उपासना करनी पड़ी।

वहीं समाजसेवी मोहन तिवारी ने बताया कि पिछले लगभग 8 साल से लगातार छठ पूजा कर रहे हैं, लेकिन इस बार शासन व प्रशासन की हिदायत के अनुसार छह घाटों पर जाना संभव नहीं था और न ही वहां कोई व्यवस्था थी। इसलिए छत पर ही टब में पानी डालकर पूजा की गई।

एक कहावत भी बड़ी प्रसिद्ध है कि चढ़ते सूरज को सब नमस्कार करते हैं। किंतु छठी मैया के व्रत में ही ढलते हुए सूर्य और उगते हुए सूर्य दोनों की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक,

शाम के दौरान सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं। ऐसे में छठ पूजा में शाम के समय सूर्य की अंतिम किरण प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि व्रतधारी महिलाओं को इससे दोहरा लाभ मिलता है।

इसी कड़ी में ओल्ड बसेलवा कॉलोनी में लोगों ने बर्तन धोने के टब, बाल्टी व खाना पकाने के बड़े भगोने को ही अस्थायी तालाब बना दिया। इतना ही नहीं इसके बाद पुरुषों ने भी महिलाओं के साथ सूर्य को अर्घ्य दिया और छठ मैया को प्रसन्न करने में अपना पूर्ण सहयोग दिया।

वो कहते हैं ना कि अगर दिल से किसी भी कार्य को किया जाए तो कितनी भी बड़ी मुश्किल क्यों ना हो सामान्य लगने लगती है। ऐसे ही कोरोना का कहर भले ही तेजी से पांव पसार रहा हो लेकिन लोगों की असीम श्रद्धा ने इस कहर को अपने छठ पर्व तक नहीं पहुंचने दिया।

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