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एक ऐसा मंदिर जहां फूलों की नहीं चढ़ाई जाती है चप्पलों की माला

सामान्यत लोग जब मंदिर जाते है तो माथा टेकते और अपनी श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा भी चढ़ाते है। चढ़ावे में लोग मुख्यत: फूलों की मालाए, प्रसाद, पैसे या सोना-चांदी चढाते हैं। वहीं हम मंदिर जाने से पहले जूते चप्पल को खोलके जाते है।

क्योंकि मान्यता है कि जूते चप्पल पहनकर मंदिर में जाना भगवान का अपमान होता है। लेकिन आज आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे है जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे। अपने देश में एक ऐसा मंदिर है जहां फूलों की माला नहीं, बल्कि चप्पलों की माला चढ़ाई जाती है।

एक ऐसा मंदिर जहां फूलों की नहीं चढ़ाई जाती है चप्पलों की माला
एक ऐसा मंदिर जहां फूलों की नहीं चढ़ाई जाती है चप्पलों की माला

यह पढकर आप भले ही चौंक गए होंगे लेकिन यह बिल्कुल सच है। कनार्टक के गुलबर्ग जिले में स्थित भव्य लकम्मा देवी मंदिर में भक्त देवी को खुश करने के लिए फूलों की माला में गुथी चप्पल की माला बांधते हैं। हर साल यहां पर फुटवियर फेस्टिवल आयोजित किया जाता है। जिसमें दूर-दूर से लोग चप्पल चढ़ाने आते है।

एक ऐसा मंदिर जहां फूलों की नहीं चढ़ाई जाती है चप्पलों की माला
एक ऐसा मंदिर जहां फूलों की नहीं चढ़ाई जाती है चप्पलों की माला

यह फेस्टिवल हर साल दिवाली के छठे दिन मनाया जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि उनके के जरिए चढाई गई चप्पल की माला को पहनकर मां रातभर घूमती है। जिससे चप्पल चढाने की सारी इच्छाएं पूर्ण होती है और दु:ख-दर्द दूर हो जाते है। वहीं इस मंदिर के बाहर नीम का एक पेड़ है, मां के भक्त मंदिर के बाहर इस पर चप्पल टांगते है।

एक ऐसा मंदिर जहां फूलों की नहीं चढ़ाई जाती है चप्पलों की माला
एक ऐसा मंदिर जहां फूलों की नहीं चढ़ाई जाती है चप्पलों की माला

लोगों का मानना है कि देवी रात के समय उनकी चढ़ाई चप्पलों को पहन कर घूमती है और बुरी शक्तियों से उनकी रक्षा करती है। इससे पहले देवी को खुश करने के लिए यहां पर बैलों की बलि दी जाती थी। ऐसी मान्यता को सुनकर लोग हैरान रह जाते है लेकिन असल यहां लोगों में इस मंदिर के प्रति बहुत सी भावनाएं है।

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