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उग्रता की ओर बढ़ा किसानों का आंदोलन, प्रदर्शन के बाद 8 तारीख को किया भारत बंद का ऐलान

कृषि कानून बिल के खिलाफ न्याय के लिए गुहार लगाते सैकड़ों भारतीय किसानों का आंदोलन अब उग्रता की ओर अग्रसर होता हुआ दिखाई दे रहा है। भले ही बीते 3 दिसंबर को केंद्र सरकार की ओर से विज्ञापन भवन में किसानों से बातचीत की गई, मगर अभी तक समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई हैं

और इसका कोई हल निकल कर सामने नहीं आ सका है। उधर नतीजा यह रहा कि अब किसानों ने कोई हल ना निकलने पर 8 दिसंबर को भारत बंद के लिए हुंकार भरी है। किसानों का कहना है कि कृषि बिल के विरोध के रूप में वह आज यानी 5 दिसंबर को देशभर में पुतला जलाएंगे और वही ठीक 3 दिन बाद यानी कि 8 दिसंबर को भारत बंद करने से पिछे नहीं हटेंगे।

वहीं दूसरी तरफ किसानों की ओर से बात करते हुए भारतीय किसान यूनियन के महासचिव एचएस लखोवाल ने सिंघू बॉर्डर से बताया कि बीते दिनों किसानों द्वारा सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग रखी थी, परंतु ऐसा ना हो सका।

जिसके कारण सैकड़ों किसानों में सरकार के खिलाफ रोष पनपता हुए देखा जा सकता है। यही कारण है कि 5 दिसंबर को देश भर में भारत के पीएम नरेंद्र मोदी के पुतले जलाकर विरोध प्रकट किया जाएगा।

उन्होंने कहा यही कारण है कि अब 3 दिन बाद किसानों द्वारा 8 तारीख को भारत बंद का निर्णय लिया गया है। वही नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि 8 तारीख को बाद भारत बंद करने के बाद अब एक निश्चित तारीख तय की जाएगी जब सभी टोल नाकों को 1 दिन के लिए फ्री कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि किसानों की मांग अब विरोध प्रदर्शन से लेकर जन आंदोलन में तब्दील हो चुकी है। इस आंदोलन को ट्रेड यूनियन फेडरेशन द्वारा भी पूर्ण समर्थन किया जा रहा है।

वही मौके पर मौजूद नेता युद्धवीर सिंह ने बताया कि अब तीनों कानून वापस लेने के अलावा उनके तरफ से कोई भी समझौता मंजूर नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा इस के अलावा उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की गारंटी भी चाहिए होगी। उन्होंने कहा कि वह बातचीत को आगे खींचना नहीं चाहते बस अपने लिए न्याय चाहते है।

वहीं कांग्रेस की किसान इकाई ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह देश भर के किसानों के हित में कृषि संबंधी तीनों ‘काले कानूनों’ को जितना जल्दी हो सके वापस ले ले। वही अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष सुरेंद्र सोलंकी ने यह भी कहा कि उनका संगठन शनिवार को प्रदर्शनकारी किसानों के समर्थन में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करेगा।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘पिछले दिनों जब कृषि विधेयक पारित हुए थे तब हमनें प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री को पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया था. ये तीनों काले कानून किसानों की मुसीबत बढ़ाने वाले हैं। इनसे सिर्फ पूंजीपतियों को फायदा होगा।

सौलंकी ने सरकार से आग्रह किया कि वह किसानों के हित में इन काले कानूनों को तत्काल वापस ले। सोलंकी ने कहा, ‘हमारा संगठन दिल्ली के निकट पिछले एक हफ्ते से डटे किसानों की सेवा में भी लगा है. हम आगे भी किसानों को हर संभव सहयोग करेंगे।

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