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किसान आंदोलन: बिना नतीजे की वार्ता से बढ़ा दबाब, राजधानी की सीमाओं को किया जायेगा पूर्णरूप से सील

सरकार और किसानो के बीच की तनातनी और बढ़ती जा रही है पाचवे दौर की बैठकों के बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया है इस आंदोलन को ख़तम करने की कवायत के रूप की जा रही बैठके अब बेनतीजा साबित ही रही है

इससे दोनो ही पक्षों पर दबाब के आसार बढ़ रहे है साथ ही यह आंदोलन और लम्बा हो सकता है इसकी भी पूरी आशंका नजर आ रही है। बैठकों के दौर दिन प्रतिदिन खत्म होते जा रहे है न सरकार किसान के हित में फैसला ले रही है और नाही किसान सरककर की बात मानने को राज़ी हैं इस कारण राज्य की सीमाओ पर भी दबाब की स्थिति बन गई है।

इसको लेकर हरियाणा किसान नेताओ ने यह आवाहन किया गया की इस आंदोलन को और आगे बढ़ाया जाये ।साथ ही किसान संगठन ने निर्णय लिया है की दिल्ली की सीमाओं पर और अधिक दबाब बढ़ने लगा है इसको ध्यान में रख कर किसान संगठनों के कहने पर राजधानी की सीमाओं पर किसानो की संख्या और बढाई जाएगी।

इन संभी हालातो को देखते हुए आंन्दोलन में शामिल सभी किसान नेताओ ने अपनी कमर कस ली है साथ ही हरियाणा और पंजाब व् देश के अन्य राज्यों से किसान इसमें शामिल होने के लिए भारी मात्रा में निकल चुके है यह सभी किसान अपने साथ जरुरत का सामान ट्रैक्टर और ट्राली में लेकर आ रहे है ताकि इसको किसी भी चीज की समम्या न हो ।

दरअसल इस बेनतीज़े की वार्ता के बाद अब किसान दिल्ली की सभी सीमाओं को सील करने की रणनीति बना रहे है इसको लेकर तैयारी की जा रही है राष्ट्रीय किसान महासंघ के प्रवक्ता अभिमन्यु ने इस बात को साफ़ करते हुए कहा की दोनों (हरियाणा और पंजाब )से किसानो का काफिला दिल्ली की और बढ़ रहा है ।

साथ मध्य प्रदेश के किसानो पलवल वाला हाईवे जाम कर दिया , मध्य प्रदेश से आये काफी किसानो को टैक्टर और ट्रोली के साथ कोसी कला वाला हाईवे पर रोका गया है 7 दिसम्बर में काफी तादात में किसान इस्क्केठे हो जायँगे ।

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