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किसान आंदोलन : आई मुसीबत तो किसान भूल गए बरसो पुराना विवाद, दिया एक दूसरे का साथ ।

कहा जाता है कि मुसीबत में दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं और जब बात अपने हक की हो और एक तो समस्या से जूझ रहे दो दुश्मन भी एक दूसरे का साथ देने लगते हैं ऐसा ही देखने को मिल रहा है किसान आंदोलन में कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए किसान नेशनल हाईवे 44 के सिंघु बॉर्डर डेरा डाले बैठे हुए हैं

साथ ही उनका साथ देने के लिए अनेकों राज्य से किसान पहुंच रहे हैं इस आंदोलन में सबसे बड़ी बात यह देखी जा रही है कि 50 सालों से चला आ रहा विवाद तक किनारा करके पहली बार पंजाब हरियाणा यूपी के किसान एक साथ आंदोलन में इकट्ठा हुए हैं

साथ ही इस आंदोलन में पंजाब हरियाणा यूपी के किसानों के बीच में आपसी प्रेम और भाईचारा देखने को मिल रहा है काफी समय से उनके प्रदेशों के बीच में क्या विवाद की स्थिति बनी थी इस बात से किसी को कोई मतलब नहीं रहा है आज के समय में केवल एक ही उद्देश्य है

और वह है एक साथ मिलकर सरकार द्वारा पारित किए गए कृषि कानूनों को रद्द कराना है तीनों प्रदेशों के किसान इस आंदोलन में पहुंच रहे हैं और कह रहे हैं कि कि पहले चाहे वह भी विवाद रहा हो उस से उनको लेना देना नहीं है उनके बीच भाईचारा ऐसे ही बना रहेगा क्योंकि यह बात सभी किसान जानते हैं कि अनेकता में एकता है

इस समय सबसे बड़ी लड़ाई सरकार के खिलाफ लड़ी जा रही है और भाईचारा ही एक ऐसी कड़ी है जिसके माध्यम से सरकार से अपनी बात को बनवाया जा सकता है दरअसल पंजाब का वर्ष 1966 में बटवारा कर हरियाणा को अलग प्रदेश बना दिया गया था

जिसके बाद से प्रदेश में पानी का विवाद शुरू हो गया उसी समय से पानी के बंटवारे को लेकर दोनों ही प्रदेशों में लड़ाई चलती आ रही है इस पानी पर काफी विवाद भी हुआ राजनीति भी की गई साथ ही कई बार आंदोलनों का भी सहारा लेना पड़ा राजनीतिक पार्टियों ने आंदोलन खड़े करके पंजाब के रास्ते तक बंद करा दिए थे

इसी तरह से अनेकों विवाद हुए लेकिन कृषि कानून रद्द कराने के लिए आंदोलन की शुरुआत करने वाले पंजाब के किसानों के साथ सबसे पहले उसका पड़ोसी राज्य हरियाणा के किसान भाईचारा निभाते हुए साथ खड़े हुए दिल्ली से सटे हुए हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर दोनों प्रदेशों के किसानों के बीच ऐसा भाईचारा और साथ दिख रहा है

कि पंजाब के किसानों के लिए हर जरूरत का सामान हरियाणा के किसान लेकर पहुंच रहे हैं पंजाब के किसानों के साथ बैठकर ही खाना खाते हैं और उनके साथ दिनभर सुख-दुख से लेकर खुशी की सभी बातें भी ताजा हो रही है यमुना के किनारे बसे 50 से ज्यादा गांव के बीच जमीन को लेकर करीब वर्ष 1970 से विवाद चल रहा है इस विवाद को खत्म करने के लिए मौजूदा सरकार ने कृषि मंत्री उमाशंकर दीक्षित की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था

और दीक्षित अवार्ड के तहत दोनों प्रदेशों की जमीन पर पर लगाए गए थे यह अवार्ड 1974 में किया गया था और उस समय यमुना की धार को आधार मानकर सीमांकन किया गया था उसके बाद विवाद नहीं मिल सका था लेकिन अगर बात की जाए हरियाणा और यूपी के किसानों की कृषि कानून के विरोध में आंदोलन हुआ।

तो यह दोनों राज्य भी एक दूसरे के भाई बन गए साथ ही इन लोगों का भी यही कहना है कि क्या विवाद था उससे कोई लेना-देना नहीं है बल्कि अब एकजुट होकर कृषि कानून को रद्द कराना चाहते हैं तीनों राज्य अब एक दूसरे के साथ भाई चारे के बंधन में बंध चुके हैं

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