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किसानों के लिए किए गए भलाई कार्यों की आड़ मे सरकार खत्म करेगी किसानों के आंदोलन की लड़ाई

किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए हरियाणा सरकार पुरजोर प्रयास कर रही है। अब इसी कड़ी में हरियाणा सरकार किसानों की भलाई के लिए किए गए कार्यों को गिरनवाकर किसानों द्वारा छेड़ी गई किसान आंदोलन की जंग को खत्म करने का प्रयास करने में पूरी तरह जुट गई हैं।

इस प्रक्रिया के तहत वह किसानों के लिए और उनके कल्याण के लिए अभी तक क्या-क्या किया गया है और आगे क्या करने जा रही हैं इन सभी बातों से अवगत कराएगी और यह सभी जानकारी विभिन्न माध्यम से किसानों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।

जिसमें यह भी बताया जाएगा कि संक्रमण काल में किस तरह सरकार ने किसानों को लाभ पहुंचाया था। कैसे उनकी गेहूं की फसल खरीदने के लिए लॉकडाउन में भी वैकल्पिक मंडियों की बेहतर व्यवस्था की थी। इतना ही नहीं एमएसपी पर किसानों का सारा गेहूं खरीदा गया था।

किसानों के खातों में सीधे सीधे तौर पर पेमेंट पहुंचाई गई थी। यह सभी जानकारियां किसानों को इस आंदोलन दौर में अवगत कराई जाएगी, ताकि उन्हें भी सोचने समझने का समय मिल सके कि केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार ने हमेशा उनकी भलाई के लिए ही प्रयास किए हैं।

वहीं आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत किसान संबंधी परियोजनाओं की जानकारी भी किसानों तक पहुंचाई जा रही है। हरियाणा सरकार ने भी इसी योजना के तहत कृषि संबंधी करीब 6600 करोड़ रुपये इसके लिए केंद्र सरकार से बजट मांगा हुआ है। उधर, प्रदेश के सीएम मनोहर लाल का दावा है कि इन परियोजनाओं से हरियाणा की किसानों में काफी सुधार आएगा और किसानों की आर्थिक हालत भी बेहतर होगी।

वही किसानों को इस बात से भी रूबरू करवाया जाएगा कि आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत करीब ढाई करोड़ किसानों के लिए 2 लाख करोड़ के रियायती ऋण की भी व्यवस्था की गई है। किसान क्रेडिट कार्ड के लिए 76.82 लाख आवेदन आ चुके हैं

और 58.53 लाख कार्ड किसानों को जारी किए जा चुके हैं। इसी तरह मत्स्य, पशुपालन और बागवानी किसानों को भी काफी अनुदान दिया जा रहा है। किसानों को 45 हजार करोड़ की आंशिक क्रेडिट गारंटी स्कीम और नाबार्ड द्वारा किसानों के लिए की गई 30 हजार करोड़ की अतिरिक्त इमरजेंसी वर्किंग कैपिटल फंड की व्यवस्था के बारे में भी बताया जा रहा है।

अब किसानों को इस बात को भय सता रहा है कि कुछ असामजिक तत्वों द्वारा उनके शांतिप्रिय आंदोलन को खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। यही कारण है कि किसान नेताओं ने अब दो टूक कह दिया है कि हमारे शांतिप्रिय प्रदर्शनों में यदि किसी ने भी हिंसा की तो वह हमारा आदमी कतई नहीं होगा।

उन्होंने यह तक कह दिया कि अगर ऐसा कोई व्यक्ति करता हुआ दिखाई दे तो पुलिस उसे तुरंत गिरफ्तार करे। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसान संगठनों की संयुक्त संघर्ष समिति आंदोलन को लेकर जो फैसला करेगी, प्रदर्शनकारी किसानों को उसकी तहत कार्रवाई करनी है। अपनी मर्जी से कुछ नहीं करना है। चढ़ूनी ने कहा कि सभी किसान संगठन उपद्रव के बिल्कुल पक्ष में नहीं हैं।

उधर हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने जानकारी देते हुए कहा कि हरियाणा इकलौता राज्य है, जिसने छह फसलों को एमएसपी पर खरीदा है। प्रदेश सरकार ने मक्के को बाजार भाव से 600 रुपये प्रति क्विंटल अधिक और बाजरा को बाजार से 700 रुपये अधिक दाम पर खरीदा। वहीं एमएसपी पर धान की 56 लाख मीट्रिक टन खरीद हुई और पैसा सीधा किसानों के खाते में भेजा गया।

पंजाब के किसान वहां की सरकार की खराब व्यवस्था से नाराज हैं और इसीलिए आंदोलनरत हैं। हम अपील करते हैं कि पंजाब से आए लोग सकारात्मक हैं और उम्मीद करते हैं कि सकारात्मकता बनी रहेगी और कोई असामाजिक तत्व किसान के आंदोलन में न घुसने पाए।

दिल्ली बॉर्डर पर 1000 से ज्यादा सिविल प्रशासन के कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। उनके साथ भी पूरा सहयोग बना रहा। चौधरी देवीलाल किसानों की आवाज थे और मेरी भी जिम्मेदारी है कि मैं किसानों के हक में काम करूं।

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