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3 महीने बाद खुले स्कूल तो सिलेबस की टेंशन में देखें छात्र, बोले कैसे करेंगे बोर्ड परीक्षा की तैयारी

संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए जहां स्कूलों को आदेशानुसार बंद करवा दिया गया था।वही हरियाणा के विभिन्न जिलों में सोमवार से सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों को खोलने की मंजूरी दी जा चुकी थी। वही स्कूल में आने वाले विद्यार्थियों में केवल दसवीं और बारहवीं यानी कि बोर्ड कक्षा के छात्र-छात्राएं ही शामिल हुए। संक्रमण के कारण स्कूल आने वाले सभी छात्रों को फेस मास्क पहनकर रखना अनिवार्य था।

वहीं फरीदाबाद जिले की बात करें तो सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों को खोल दिया गया है। यहां भी केवल बोर्ड क्लास के छात्रों के लिए ही स्कूल आने की अनुमति दी गई थी

और स्कूल आने- जाने का समय लगभग 10:00 से 3:00 बजे तक तय किया गया। स्कूल आने वाले सभी छात्र-छात्राओं का प्रवेश द्वार पर ही हाथ सेनीटाइज करवाया गया। इतना ही नहीं सभी छात्रों को फेस मास्क पहनकर रखने की सख्त हिदायत भी दी गई।

वही लगभग 3 महीने बाद स्कूल खोलने की खुशी से जहां छात्र झूम उठे थे। वही छात्रों का कहना था कि 3 महीने बाद स्कूल खोलने से वह खुश तो है लेकिन बार-बार संक्रमण के कारण स्कूल बंद होने की आशंका से वह अपनी पढ़ाई में पूरी तरह से मन नहीं लगा पा रहे हैं।

वहीं छात्रों का कहना था कि महीनों बाद स्कूल खुलने से उन्हें एक बार फिर अपनी सिलेबस को रिवाइज करने में मशक्कत का सामना करना पड़ेगा। उन्हें पहले से अधिक समय भी अपनी पढ़ाई के लिए देना होगा ताकि पिछले दिनों जो पढ़ाई अधूरी रह गई थी उन्हें भी पूरा किया जा सके।

प्रशासन के आदेश के मुताबिक 9वीं व 11वीं के छात्रों के लिए 21 दिसंबर से स्कूल खोले जाएंगे। किसी भी लक्षण वाले छात्र व शिक्षको को कोविड-19 जांच कराना अनिवार्य होगा।

21 सितंबर से खुले थे प्रदेश में स्कूल


राज्य सरकार ने प्रदेश में 21 सितंबर से स्कूल खोल दिए थे। इसके तहत कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों को स्कूल आने की अनुमति दी गई थी, लेकिन नवंबर महीने कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी। वहीं प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार स्कूलों से शिक्षकों व छात्रों के भी संक्रमित होने के मामले सामने आने लगे। इसके बाद सरकार ने 20 नवंबर को स्कूल बंद रखने के आदेश दे दिए थे।

स्कूलों को इन नियमों का पालन होगा अनिवार्य

कक्षाओं में सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित करनी होगी। स्कूल आने वाले सभी शिक्षकों व विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। कोरोना के बिना लक्षण वालों को ही परिसर में प्रवेश मिलेगा। बिना लक्षण वाले शिक्षकों व विद्यार्थियों के कोरोना टेस्ट की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अफसरों के साथ मिलकर करनी होगी, निगेटिव रिपोर्ट वाले छात्रों को ही स्कूल आने की अनुमति देें।

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