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घोटाले में हुड्डा के वकील ने दी अजीब दलील कहा, हम तो डूबेंगे सनम तुम्हें भी ले डूबेंगे

हरियाणा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री आने की भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सत्ता में रहते हुए घटित हुए मानेसर गुरुग्राम घोटाले में भूपेंद्र सिंह हुड्डा अभियुक्त है। दरअसल इस घोटाले की सुनवाई के बीच वकीली ने एक अजीबोगरीब दलील दे दी किसी से उचित कहना कहीं से भी लाजमी नहीं होगा।

दरअसल, वकील ने कहा हम तो डूबेंगे सनम, तुम्हें भी ले डूबेंगे। यहां तुम्हें से तात्पर्य था कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला। वकील की दलील मे फाइल तत्कालीन उद्योग मंत्री ने हस्ताक्षर कर अग्रसारित की थी, जिसे मुख्यमंत्री की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है।

वहीं अगर असल दोषी की बात करें तो वह उद्योग मंत्री ही हैं। वैसे तो साफ तौर पर वकील साहब द्वारा उद्योग मंत्री का नाम कहीं उच्चारित ही नहीं किया गया है। परंतु उद्योग मंत्री के बारे में बताने का कार्य स्वयं भाजपा नेता जवाहर यादव ने ट्वीट कर बखूबी कर दिया है। नेता जवाहर यादव ने ट्वीट कर यह जिक्र कर दिया कि उस समय रणदीप सुरजेवाला उद्योग मंत्री थे।

जिसके पास सारा ठीकरा सीबीआई पर गिर पड़ा है और उनसे जवाब देना भारी पड़ जाएगा कि उद्योग मंत्री को क्यों नहीं अभियुक्त बनाया गया था। अब सीबीआइ को जवाब देना पड़ेगा कि उसने उद्योग मंत्री को क्यों नहीं अभियुक्त बनाया। उसे उद्योग मंत्री को अभियुक्त बनाना भी पड़ सकता है, क्योंकि कुछ अफसरों को अभियुक्त न बनाने पर अदालत ने तल्ख टिप्पणी भी की है।

एक युवा नेता ना सिर्फ पूरे देश भर में बल्कि हरियाणा में बहुत चर्चित थे। बात उस समय की है जब अन्ना आंदोलन चल रहा था उन्होंने उस समय युवाओं को लेकर दिल्ली में राहुल गांधी के घर को पूरी तरह घेर लिया था। तदुपरांत ही आम आदमी पार्टी का गठन किया गया और वह हरियाणा में आम आदमी के चेहरे के रूप में उभर कर आया।

वह नाम था रोहतक वाले नवीन जयहिंद का। वैसे तो कुछ बातों पर उनके और योगेंद्र यादव के काफी बार मतभेद भी होते हुए दिखाई दिए थे। जिसके बाद अरविंद केजरीवाल द्वारा नवीन का पक्ष भी लिया गया और उसके बाद योगेंद्र वहां से आउट हो गए। पहला लोकसभा चुनाव रोहतक में 2014 को हुआ था।

वहीं दूसरे चुनाव 2019 में हुआ था जहां फरसा लहराते हुए वह फरीदाबाद से लड़े थे। वह दोनों ही चुनाव हार गए थे लेकिन हाथ में झाड़ू लिए हरियाणा वासियों को झाड़ू उठाने की शिद्दत से अभी प्रेरणा देते रहें। ऐसे ही अचानक एक दिन सूचना प्राप्त हुई थी उनकी पत्नी स्वाति मालीवाल का तलाक हो गया था तब से नवीन जयहिंद ना जाने कहां लापता से हो गए।

बात पुरानी है। आठ वर्ष पहले हरियाणा कांग्रेस के तत्कालीन प्रवक्ता धर्मबीर गोयत ने कहा था- दुष्कर्म की 90 फीसद घटनाएं आपसी सहमति से होती हैं। पूरे देश में उनके बयान के बाद बवाल मच गया था। मीडिया ने इसे सर पर उठा लिया था। उठाना भी चाहिए था। गलत बात तो गलत ही होती है,

लेकिन अब छत्तीसगढ़ महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक भी वही बात कह रही हैं कि महिलाएं अपनी मर्जी से संबंध बनाती हैं और फिर दुष्कर्म का आरोप लगाकर केस कर देती हैं तो कहीं कोई आवाज नहीं। चर्चा नहीं। क्यों। छत्तीसगढ़ वालों पर करम क्यों, जबकि किरणमयी तो महिला हैं।

महिला आयोग की अध्यक्षा हैं। दूसरी तरफ धर्मबीर गोयत का उस एक बयान की वजह से पोलिटिकल करियर ही चौपट हो गया। नेपथ्य में चले गए। एक ही अपराध में मीडिया और कांग्रेस का दोहरा मापदंड क्यों? यह प्रश्न तो बनता ही है।

गुरुग्राम में भाजपा की प्रदेश ईकाई ने बैठक कर केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के विरोध में कुछ किसान संगठनों के आंदोलन का जवाब देने की रणनीति बनाई। वहां उपस्थित सांसदों और प्रतिनिधियों ने अपने-अपने सुझाव दिए। कुछ सुझाव अच्छे थे। उन्हेंं सुनकर भाजपा के प्रदेश प्रभारी और महाराष्ट्र के दिग्गज नेता विनोद तावड़े शाबाशी देने के बजाय भड़क गए।

बोले- ये सुझाव पहले क्यों नहीं दिए और इन पर काम क्यों नहीं किया गया। खैर, फैसला हुआ कि सतलुज-यमुना लिंक नहर के पानी का मुद्दा उठाकर पंजाब के आंदोलनरत किसानों से जवाब मांगा जाए।

इस पर सबकी सहमति भी बनी, लेकिन मीटिंग से बाहर निकलने के बाद एक नेता ने टिप्पणी की कि एसवाइएल के पानी को मुद्दा बनाने की बात तो कई नेता कई दिनों से कर रहे हैं। प्रदेश नेतृत्व ने एसवाइएल तक पहुंचते-पहुंचते इतनी देर क्यों कर दी, लेकिन जो हुआ, सो हुआ, देर आयद दुरुस्त आयद।

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