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किसान आंदोलन : हाड़ गलाने वाली ठंड नही तोड़ सकती इरादे ,11 बजे के बाद पड़ती है ओस

अपने हक़ की लड़ाई लड़ता किसान सरकार से भीड़ गया है, बोल रहा है की जो काले कानून बनाये है उनको वापस ले ताकि किसानो को उनकी मेहनत का वाजिब फल मिल सके .एक और कोरोना दूसरी और सरकार से ख़िलाफ़त दोनो ही जटिल समस्या . वही एक और मुसीबत किसानो को घेरे हुए है जिससे लड़ना मुश्किल तो है पर नामुमकिन नहीं है।

बतादे की आंदोलनरत किसान इस समय दिल्ली को सीमा पर डट कर बैठा है और अपनी बात को पुख्ता तरीके से रख रहा है वही जयपुर दिल्ली हाईवे के शाहजंहापुर पर राजस्थान के किसानो का काफिला अपना आशियाना बना कर रुका हुआ। दिसंबर की सर्दी भी अपने पुरे चरम पर है।

हजारों किसान राजस्थान के शाहजहांपुर बॉर्डर पर इस सर्दी की रात के साये में डेरा डाल कर बैठे है . इस सर्दी में रात का तापमान 6’C होता है लेकिन किसान के इरादे किसान की हिम्मत को कम नहीं होने दे रहे है ।

एक मिडिया रिपोर्ट के अनुसार इतनी ठंड के मौसम में किसान खेतो के बीच लगे टेंट में रहे है . किसानो का कहना है की रात 11 बजे के बाद ओस की बूँदे पड़ने लगती है और किसानो के रजाई गद्दे सब गीले हो जाते है .और उसके कारण सब को सुबह के 4 बजे ही उठना पड़ता है और उनको खेतो के पास आलाव जलाकर बैठना पड़ता है।

वही अगर बात की जाये तो सामाजिक कार्यकर्ता की तो वो अपना योगदान दे रहे है योगेन्द्र यादव भी दिन-रात किसानों के बीच में हैं। वे भी रात को यहां टेंट के नीचे सोते हैं। ओस की बूंदों से भीगते हैं। अलाव के आगे बैठकर किसान नेताओं से चर्चा करते दिख जाते हैं। उनका कहना है कि किसानों के हित में सरकार झुकने को तैयार नहीं हैं, लेकिन अब किसानों ने भी ठान लिया है कि पीछे नहीं हटेंगे।

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