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देश की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए मुसीबत बन रहा है किसान आंदोलन रोजाना हो रहा है इतने करोड़ का नुकसान

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हरियाणा : किसान आंदोलन की गति दिनों दिन बढ़ती जा रही है सरकार के खिलाफ छेड़ा गया विगुल अब ना जाने कितनी और नई तरंगे निकलेगा इसका अन्न्दज़ा लगाना मुश्किल है . किसान अपनी बात पर अडिग है उनका कहना है की जब तक सरकार अपने बनाये बिल वापस नहीं लेती तब तक हम यही पर डेट रहेंगे .

हालाँकि सरकार बातचीत के राज़ी हो गई हज पर दोनों पक्ष कब एक दूसरे के सामने बैठकर समस्या का हल खोजेंगे इसका अभी पता नहीं लग रहा है . 20 दिन से लगातार चल रहे आंदोलन का असर साफ़ तौर पर उद्योग जगत पर भी पड़ रहा है इंडस्ट्री चैम्बर एसोचैम का कहना है की किसान आंदोलन के चलते रोजाना काफी नुकसान हो रहा है

देश की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए मुसीबत बन रहा है किसान आंदोलन रोजाना हो रहा है इतने करोड़ का नुकसान

उद्योग चैम्बर एसोचेम का कहना है की देश को इस आंदोलन से करीब 3500 से लेकर 5000 करोड़ का रोजाना नुकसान हो रहा है. देश की इकॉनमी कुछ दिन पहले ही तो पटरी पर तो लौटी थी उसके बाद धीरे धीरे उद्योग जगत पहले हुए नुकसांन नहीं पूरा कर पाया है उसके बाद यह आंदोलन और आग में घी डालने का काम कर रहा है।

देश की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए मुसीबत बन रहा है किसान आंदोलन रोजाना हो रहा है इतने करोड़ का नुकसान

आखिर आंदोलन से क्यों हो रहा है नुकसान

किसान दिल्ली की सीमा को घेर कर बैठे है इसके कारण सारे राजमार्ग बाधित हो गए है जिसके कारण माल की आवाजाही के लिए दूसरे रास्ते लेने पड़ रहे है जिसके कारण लॉजिस्टिक लागत 8 दे 10 फ़ीसदी की बढ़त हो सकती है ।

देश की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए मुसीबत बन रहा है किसान आंदोलन रोजाना हो रहा है इतने करोड़ का नुकसान

इंडस्ट्री जगत को नुकसान

एसोचैम का कहना है की किसान आंदोलन से पंजाब और हरियाणा हिमाचल प्रदेश जैसे परस्पर जुड़े आर्थिक क्षेत्रों के लिए व्यापक रूप से नुकसानदेह है क्योंकि इंडस्ट्री चैम्बर सीआईआई का कहना है कि महामारी के कारण जो अर्थव्यवस्था नीचे आ गई थी उसको संभालने की कोशिश की जा रही थी

देश की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए मुसीबत बन रहा है किसान आंदोलन रोजाना हो रहा है इतने करोड़ का नुकसान

लेकिन किसान आंदोलन से अब फिर पहले जैसे हालात हो रहे है वही इस बारे में कुंडली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सदस्य धीरज चौधरी का कहना है कि किसानों आंदोलन के कारण कच्चे माल उत्पादन के लिए सहायक उपकरण और उससे बाहर तैयार माल को हम तक पहुँचना मुश्किल हो गया है ऐसे में अब 30% कारीगर और कोई कच्चे माल के साथ उद्योग बंद होने की कगार पर है। प्रोडक्शन पूरी तरह से ठप्प हो चुका है

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