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आंदोलनकारी किसानों ने मंत्री कंवरपाल गुर्जर का घेराव कर सेकंड हैंड स्कूटी में घूमने वाले दिन दिलाए याद

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का गुस्सा अब उबाल भरने लगा है। जहां किसानों ने सड़क पर उतर कर अपना विरोध प्रदर्शन आंदोलन में तब्दील करके रख दिया है। अब वह किसी भी नेता को खरी खोटी सुनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसी कड़ी में अब हरियाणा के मंत्री कंवरपाल गुर्जर भी किसानों का शिकार हो गए और उनका भी घेराव कर किसानों द्वारा उन्हें खूब सुनाया गया।

इतना ही नहीं सैकड़ों किसान तो मंत्री के निवास तक पहुंच गए और लाउडस्पीकर पर उन्हें खूब सुनाया गया। इतना ही नहीं किसानों ने तो उन्हें उनके स्कूटी में घूमने वाले दिन तक याद दिला दी है, और कहा कि कभी आप एक सेकंड हैंड स्कूटी पर घूमा करते थे।

आज करोड़पति बन गए तो किसानों का खयाल ही मन से निकाल दिया। उन्होंने लाउडस्पीकर पर जोर जोर से चिल्ला कर कहा कि ‘कभी आप एक सेकंड हैंड स्कूटर पर घूमा करते थे आज आप करोड़पति बन गए तो किसानों को भूल गए ?’

किसानों की यह भी बोले कि , ‘ये जो बड़े आदमी बैठे हैं, ये किसकी बदौलत हैं? ये किसानों के बदौलत हैं। उन्होने कहा एक समय था जब आप सेकंड हैंड टायर लेकर भागा करते थे। वहीं चुनावों के दौर में आप गांव में जाकर लोगों से साथ देने को कहते थे औऱ आप हमें ही भूल गए। क्यों भूल गए? हमने आपको वोट दिया है, कुछ लिया नहीं।’

गौरतलब, कंवरपाल सिंह गुज्जर जगाधरी सीट से विधायक हैं। पिछली बार वह स्पीकर थे लेकिन इसबार उन्हें मंत्रिपद मिला है। वह 1990 से भारतीय जनता पार्टी के साथ हैं। वह दो बार भारतीय जनता पार्टी के जिला महासचिव रह चुके हैं। 2014 में हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष बने थे।

वही आज किसानों द्वारा दिल्ली – नोएडा लिंक रोड को भी ब्लॉक कर दिया है। एक लॉ स्टूडेंट की किसानों को बॉर्डर से हटाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। आज दिल्ली और नोए़डा के बीच भारी जाम देखने को मिल रहा है। लॉ स्टूडेंट ऋषण शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि सड़क जाम होने की वजह से आम लोगों को दिक्कत होती है। इस याचिका में अधिकारियों को किसानों को हटाने के निर्देश देने की मांग की गई है।

दिल्ली पुलिस ने 27 नवंबर को किसानों से कहा था कि वह निरंकारी ग्राउंड जाकर प्रदर्शन करें। किसान यूनियन ने अब दिल्ली के मुख्य बॉर्डरों को जाम करने की धमकी दी है। केंद्र सरकार ने कहा है कि वह विभिन्न मुद्दों पर किसानों से बात करने को तैयार है लेकिन कृषि कानून को वापस नहीं लिया जाएगा।

इसके बाद किसानों ने भी सीमाओं से हटने से इनकार कर दिया है। सिंधु बॉर्डर पर भी बड़ी संख्या में किसान डेरा डाले हैं। अब किसानों का कहना है कि वह ना सुनने के मूड में बिल्कुल भी नहीं है। वह इतने दिन से लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। मौसम भी तेजी से मिजाज बदल रहा है,

और बावजूद इसके किसान अपने आंदोलन को निभाने में जुटे हुए हैं। ऐसे में अब जरूरत है कि सरकार उनकी तरफ भी ध्यान दें और जल्द से जल्द जितना हो सके इस आंदोलन को खत्म कराने में सहयोग दें।

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