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घास के जमावड़े ने नहर को किया मैदान में तब्दील, आमजन की बढ़ी मुश्किल

सिंचाई विभाग और रेलवे अधिकारियों की लापरवाही का भुगतान गुरुग्राम नहर के किनारे उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों को करना पड़ रहा है। इसका कारण यह है कि गुरुग्राम नहर में रेलवे ट्रैक का पुल जो है वह नीचा हो गया है और वहां घास व कचरे का जमावड़ा लगा रहता है। यह कचरा काफी दिनों से जमा है। तो इस कारण पानी में सड़ने के चलते यहां से आवागमन करने वाले लोगों का सांस लेना भी दूभर हो गया है।।

दरसअल, यह गुरुग्राम नहर ओखला बैराज से निकाली गई थी। इस नहर के माध्यम से फरीदाबाद से होते हुए गुरुग्राम, नूंह और राजस्थान के जिला अलवर के खेतों की सिचाई का कार्य भी किया जाता है। वही उक्त नहर में जगह-जगह पर कचरा जमा होने से पानी क्षमता के अनुसार नहीं पहुंच रहा है, जिससे चलते पानी टेल तक बहुत कम मात्रा में पहुंचता है।

जानकारी के मुताबिक कई बार हथीन के विधायक प्रवीण डागर और नूंह के विधायक अफताब अहमद ने सिचाई विभाग के अधिकारियों से इस समस्या के बारे में जानकारी दी गई थी। परंतु आज तक यह समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।

वहीं इस नजारे की बात करें तो नहर में कचरा की परत पर जमा घास को देख कर लगता है कि ये शायद कोई खेल का मैदान है। नहर में कचरा बहकर आता है और रेलवे ट्रैक का पुल नीचा होने से रुक जाता है। जिसकी साफ-सफाई का जिम्मा सिचाई विभाग के अधिकारी दें रहे है और न ही रेलवे के अधिकारी।

कुलदीप सिंह ने बताया कि कुछ ट्रैक्टर चालक सेप्टी टैंक लेकर आते हैं, और नहर किनारे ही गंदगी को डाल कर चलते बनते हैं। उन्होने बताया कि जब इन लोगों को टैंक खाली करने से मना करते हैं, तो झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। वही बलवंत सिंह हम नहर किनारे अपना उद्योग लगाए हुए हैं।

नहर में कचरा जमा होने के बारे में कई बार सिचाई विभाग के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन से शिकायत की है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पीके सिन्हा ने बताया कि हमने नहर के कचरा की सफाई के लिए प्रस्ताव बनाकर विभाग के अधीक्षण अभियंता के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है। जल्दी ही प्रस्ताव मंजूर हो जाएगा और टेंडर लगाकर सफाई करा दी जाएगी।

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