भले ही ठंड अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया हो लेकिन उधर हरियाणा की कुंडली बॉर्डर पर डेरा जमाए कृषि कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों का आंदोलन और उनका हौसला तूफान से भी तेज बुलंद हो रहा है। ठंड के बदलते मिजाज को देखते हुए किसानों के लिए हर पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं,
ताकि किसानों को ठंड से बचाया जा सके। जहां तिरपाल व टेंट के जरिए ठंड को रोक पाना असंभव हो रहा था। ऐसे में रातों-रात पराली और लकड़ी की सहायता से किसानों के लिए झोपडिय़ो को बनाकर तैयार किया गया।

जिसे तैयार करने के लिए युवा किसानों ने रातभर आस-पास के गांव से पराली एकत्रित कर और झोपड़ी बनाने में अपना पूर्ण सहयोग किया।
हरियाणा में पिछले 2 दिन में हुई हल्की फुल्की बारिश में ठंड में काफी तेजी देखने को मिली है। जिसका प्रभाव आंदोलन कर रहे बुजुर्ग किसानों पर देखने को मिल रहा है। दरअसल, सड़क पर भारी मात्रा में पानी एकत्रित होने के चलते किसानों को टेंट रखने में काफी मशक्कत हो रही थी।
जिसके बाद ही युवा किसानों ने पराली और बल्लियों की सहायता से झोपड़ी खड़ी कर डाली। इस पराली की झोपड़ी में बारिश का पानी नहीं आ सकेगा और ठंड से भी बचाव में काफी सहायता मिलेगी।
वही धरना प्रदर्शन कर रहे कुंडली से 2 किसानों की मौत के बाद माहौल काफी गमगीन हो गया था।।जिसके बाद मुख्य मंच से मृतक किसानों को श्रद्धा सुमन श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
वहीं उक्त किसानों के संघर्ष को सदैव यात्रा करने की घोषणा भी हुई। वही मंच से घोषणा करते हुए यह भी बताया गया कि बुजुर्ग किसानों को ठंड से बचाव के लिए हर नामुमकिन प्रयास किए जा रहे हैं और यह प्रयास रंग भी लाएंगे।
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