महामारी के दौरान कहीं लोग बेरोजगार हुए। और साथ ही भारी नुकसान का भी भुगतान करना पड़ा। हालांकि इससे लोग आत्मनिर्भर भी हुए हैं। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही। आज की कहानी जम्मू के रहने वाले नरेन सराफ की। सराफ ने होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया है। और उनका सपना हमेशा से ही ताज होटल में नौकरी करने का था।
बता दे की ताज होटल में सराफ का चयन भी हो गया था। लेकिन तभी महामारी के चलते लॉकडाउन लगा और उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। लॉकडाउन के कारण सराफ अपने घर पर ही थे। तब उन्हें रेस्टोरेंट खोलने का सुझाव आया। और उन्होंने एक अपने घर पर ही रेस्टोरेंट शुरू किया।

महज दो महीने में ही उन्हें लोगों से अच्छा रेस्पॉन्स मिलने लगा। नरेन सराफ की उम्र 23 साल है सराफ बताते हैं। कि होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान वे इंटर्नशिप के लिए जोधपुर के उमेद भवन गए थे। वहां उनके काम को काफी पसंद किया गया। और उनकी प्रोफाइल बनाकर ताज होटल को भेज दी गई। साल 2020 मार्च में सराफ का सिलेक्शन भी हो गया।
सराफ को सितंबर में जॉइन करना था। लेकिन,महामारी के चलते वे उस समय जॉइन नहीं कर पाए। कुछ समय बाद उनकी नौकरी नहीं रही। इसी बीच सराफ ने तय किया कि अपने खाली समय को अच्छे काम में उपयोग करेंगे। सराफ को कुकिंग तो आती ही थीं। फिर सराफ ने कुछ रेसिपी बनाई।
इसके बाद उन्होंने कुछ वेज और नॉन वेज रेसिपी बनाई और अपने परिवार और रिश्तेदारों को खिलाया। उनके बनाए खाने का टेस्ट लोगों को पसंद आया। और उसके लिए सराफ को सराया भी गया। लोगों से अच्छा रेस्पॉन्स मिलने के बाद सराफ ने तय किया कि वे अपना ही रेस्टोरेंट खोलेंगे।
सराफ ने अपने रेस्टोरेंट का नाम ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ रखा वह बताते है कि उन्होंने खाने के टेस्ट पर फोकस किया। सराफ का मानना है कि ‘लोगों के दिलों तक पहुंचना है तो उनके खाने पीने के साथ साथ उनके स्वाद का भी ध्यान रखना पड़ेगा।
सफार ने अपने रेस्टोरेंट का स्पेशल मेन्यू तैयार किया।जिसमें नॉर्थ इंडियन वेज- नॉन वेज, साउथ इंडियन, गाली स्टाइल फिश और कीमा राजमा जैसे फूड शामिल किए।
इसके साथ ही युवाओं के टेस्ट को ध्यान में रखते हुए काबली कबाब और बर्गर बनाना शुरू किया। सराफ ने अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया की मदद ली और अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर ग्रुप बनाकर लोगों को जोड़ना शुरू किया।
वे अपने खाने के सैंपल सोशल मीडिया पर शेयर करने लगे। वह ग्राहकों को अपने बिजनेस की ओर आकर्षित करने के लिए खाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने लगे। इस काम में उनके दोस्तों ने भी मदद की। इससे ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी। सराफ कहते हैं, ‘हमारे ज्यादा तर ग्राहक वही हैं।
जिन्होंने पहली बार खाने का ऑर्डर किया था। और उन्हें हमारा काम पसंद आया है। इससे हमारा मनोबल बढ़ा और अब हमने होम डिलीवरी भी करने लगे है। सराफ कहते हैं कि उन्होंने वहीं किया है, जो बचपन से पसंद था और अपने ग्राहकों को वही परोस रहे हैं, जो बचपन से खुद खाते रहे हैं। ताजा और लजीज स्वाद।
Written By :- Radhika Chaudhary
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