नीलम पुल बंद होने के बाद अब बाटा पुल बंद होने का ख़तरा मँडरा रहा है। आपको ज्ञात होगा कि नीलम पुल आग लगने की वजह से काफ़ी दिनो तक बंद रहा था परंतु ऐसा ही वाक्या अब बाटा पुल के नीचे हुआ है।
यह जो तस्वीरें आप देख रहे है यह आग लगने की वजह से बिखरी राख है। अगर राख है तो आग भी लगायीं गयी होगी। ये आग लगाने कोई बाहर से नहीं आते बल्कि वही के आस पास के लोग ऐसी गतिविधि को अंजाम देते है और वहाँ से खिसक लेते है।

आपको बता दे कि आज सुबह 8:00 बजे के आस पास इस पुल के नीचे आग लग गयी थी। हालाँकि आग पर क़ाबू पा लिया गया था। अगर आग पर क़ाबू ना पाया होता तो आज नीलम पुल की तर्ज़ पर बाटा पुल भी बंद करना पड सकता था।
गरिमत यह रही कि किसी समझदार व्यक्ति ने इस आग पर पानी डाल दिया था। आज सवाल आम जनता से पूछ रहे है हम कि सारी ज़िम्मेवारी प्रशासन की है ? वहाँ के दुकानदारो या वहाँ रह रहे लोगों की कोई ज़िम्मेदारी नहीं ? कब तक हम प्रशासन को ज़िम्मेवार ठहरायेंगे।
दरअसल आस पास के दुकानदार अपना कूड़ा-कचरा उस जगह पर फ़ेक देते है। जब कूड़ा भारी मात्रा में वहाँ जमा हो जाता है तो लोग इसमें आग लगा देते है। जिसके फलस्वरूप बड़ी घटना हो सकती थी। क्या इको ग्रीन की गाड़ी वहाँ तक नहीं पहुँचती ?
जब नीलम पूल बंद था तो काफ़ी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आम लोगों को पुरे फ़रीदाबाद का चक्कर काटना पड़ता था तब जाकर वो अपने गंतव्य तक जाते थे। अब वहाँ के नागरिकों को भी अपने जिले के बारे में थोड़ा सोचना चाहिए और इस तरह कि गतिविधि को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
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