तीन व पांच तालाब विधि के अनुसार तालाब बनाने के लिए खोदाई होती है। गांव का गंदा पानी सबसे पहले वाले तालाब में जाता है। जब यह भर जाता है, तो पाइप से दूसरे और फिर तीसरे, चौथे और पांचवे तालाब में पानी जाता है।
पानी के साथ आया कचरा सबसे पहले वाले तालाब में रह जाता है और बाकी दूसरे में नीचे जम जाता है। तीसरे या पांचवे तालाब तक साफ पानी ही पहुंचता है। आखिरी तालाब में पहुंचे पानी का प्रयोग सिचाई के लिए किया जा सकता है।

जल संरक्षण को लेकर शासन-प्रशासन अब गांव पर अधिक ध्यान दे रहा है। पुराने तालाब को जीवंत करने और नए की खोदाई करना शुरू कर दिया है। प्रथम चरण में 31 गांव में काम चल रहा है। यहां तीन व पांच तालाब विधि अपनाई जा रही है। जबकि दूसरे चरण में 22 गांव में तालाब की सुध ली जाएगी।
इसके लिए पंचायती राज विभाग को अनुमति मिल चुकी है। इस योजना से एक ओर गांव में पानी निकासी की समस्या खत्म होगी तो दूसरी ओर भूजल स्तर पर भी असर पड़ेगा। तालाब के पानी का सदुपयोग कर फसलों की सिचाई की जा सके। इस विधि से तैयार हो रहे तालाब
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं नगराधीश पुलकित मलहोत्रा ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत गांव के तालाबों को फिर से जीवंत किया जा रहा है। इसके लिए कुल 53 गांव को चिन्हित किया गया है।
यमुना नदी किनारे गांव मंझावली, अरूआ, फज्जुपुर खादर, पियाला, फरीदपुर, शाहबाद एवं बदरपुर सैद के तालाबों को तीन व पांच तालाब विधि के रूप में बदला जा चुका है। गांव फज्जुपुर खादर में नए तालाब का निर्माण किया गया है।
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