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देश के वो दो मंदिर, जहां भगवान की मूर्तियों से निकलता है पसीना, जानिए क्‍या है रहस्‍य?

क्या आपने कभी सुना है,ऊंची-ऊंची पहाड़ियों पर बसे मंदिरों में भगवान की मूर्ति को पसीना आता हो। हम जिस दुनिया में रह रहे हैं, वह दुनियां कई अद्भुत रहस्यों से भरी पड़ी है। दुनिया में कई रहस्यमयी चीजें हैं, जिनका जवाब आज तक वैज्ञानिकों के पास भी नहीं है। आइए आज हम आपको दुनिया के ऐसे दो मंदिरों के बारे में बताते हैं, जहां भगवान की मूर्ति से पसीना निकलता है और इसके पीछे की पहेली बुझाने में आज तक कोई भी सफल नहीं हो सका।

यह एक अनसुलझी पहेली भी है। तमिलनाडु में कार्तिकेय मुरुगा के सिक्कल सिंगारवेलावर मंदिर में हर साल अक्टूबर से नवंबर के बीच में एक उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस उत्सव के दौरान भगवान सुब्रमण्य की मूर्ति से पसीना निकलता है। यह उत्सव भगवान सुब्रमण्य की राक्षस सुरापदमन पर जीत की खुशी में मनाया जाता है।

देश के वो दो मंदिर, जहां भगवान की मूर्तियों से निकलता है पसीना, जानिए क्‍या है रहस्‍य?

यकीनन आप ये सब सुनकर हैरान हो रहे होंगे। लेकिन यह हकीकत है। हिंदू ग्रंथों के मुताबिक यह पसीना सुब्रमण्य के क्रोध का प्रतीक है, जो उन्हें सुरापदमन को मारने के इंतजार में आता है। ऐसी मान्यता है कि जैसे-जैसे यह उत्सव समाप्त होने को आता है, वैसे-वैसे सुब्रमण्य की मूर्ति का पसीना कम होने लगता है। इस पसीने को मंदिर के पुजारी पानी जल के तौर पर भक्तों पर छिड़कते हैं। कहा जाता है कि शरीर पर यह छिड़काव पड़ने पर शारीरिक पीड़ा कम होने के साथ-साथ जीवन में सुख की प्राप्ति होती है।

ऐसा ही एक मंदिर देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में मिलता है। आपने कभी सुना है,ऊंची-ऊंची पहाड़ियों पर बसे मंदिरों में भगवान की मूर्ति को पसीना आता हो या किसी खास मौके से पहले अचानक से मूर्ति से तेज पसीना निकलने लगे और जैसे-जैसे कोई प्रोग्राम खत्म होने को हो,पसीना निकलना भी कम हो जाए।

यह हमारे देश के ईश्‍वरीय रहस्‍यों में से एक है। चंबा जिले से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर शक्तिपीठ भलेई माता का मंदिर है, जो देवी भद्रकाली को समर्पित है। यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना है। यहां के पुजारी बताते हैं कि भलेई माता की मूर्ति प्रकट हुई थी, जिसके बाद मंदिर का निर्माण किया गया। पुजारी ये भी बताते हैं कि कई बार मूर्ति से पसीना निकलने का रहस्य जानने के लिए वैज्ञानिकों ने भी खोज की, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।

Avinash Kumar Singh

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