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जींद रैली में कई बड़े नेताओं की गैरहाजिरी से तीसरे मोर्चा बनाने की मुहिम को जोरदार झटका

हरियाणा जिले में 25 सितंबर के दिन को पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के जन्मदिवस को काफी धूमधाम से मनाया गया। ताऊ देवीलाल के चाहने वालों ने उनके जन्मदिन के मौके पर कार्यक्रमों का आयोजन किया। चौधरी देवीलाल के जन्मदिन को कहीं रक्तदान तो कहीं सम्मान दिवस के रूप में मानाया गया।

लेकिन चौधरी ओमप्रकाश चौटाला द्वारा किया गया देश में तीसरे मोर्चे का एलान महज एक दावा साबित हुआ। ओमप्रकाश चौटाला द्वारा बनाया गया तीसरे मोर्चा की मुहिम को जोरदार झटका लगा। मंच से बोलने वाले किसी भी नेता ने तीसरे मोर्चे के गठन व देश में इस मोर्चे पर बात न करते हुए केवल किसान एवं कृषि कानूनों पर जोर दिया।

जींद रैली में कई बड़े नेताओं की गैरहाजिरी से तीसरे मोर्चा बनाने की मुहिम को जोरदार झटका
जींद रैली में कई बड़े नेताओं की गैरहाजिरी से तीसरे मोर्चा बनाने की मुहिम को जोरदार झटका

ओमप्रकाश चौटाला जहां एक ओर जेल से आने के पश्चात आईएनएलडी को फिर से खड़ा करने में जुटे थे, वहीं देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गजों के साथ हुई बैठकों में आईएनएलडी द्वारा यही दावा किया जाता रहा है कि ताऊ देवीलाल के जन्मदिवस के मौके पर जींद में आयोजित होने वाली सम्मान दिवस रैली में तीसरे मोर्चे का गठन किया जाएगा। इस मोर्चे के माध्यम से ओमप्रकाश चौटाला क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाना चाहते थे। जींद की रैली में हुई भारी भीड़ ने हरियाणा जिले में भले ही आईएनएलडी के लिए संजीवनी का काम किया हो यह राष्ट्रीय राजनीति में एकजुटता नहीं दिखा पाई।

जींद रैली में कई बड़े नेताओं की गैरहाजिरी से तीसरे मोर्चा बनाने की मुहिम को जोरदार झटका

आईएनएलडी नेताओं द्वारा किए गए दावों के अनुरूप इस रैली में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार व राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी तथा किसान नेता राकेश टिकैत शामिल नहीं हुए। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने मंच से क्षेत्रीय दलों को एकजुट होने की अपील की। लेकिन उन्होंने भी स्वयं न करते हुए चौटाला को देश के सभी राज्यों का दौरा करके क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने के लिए अभियान चलाने का संदेश दिया।

आईएनएलडी नेताओं द्वारा किए गए वादों के अनुसार कई दिग्गजों के अलावा राकेश टिकैत के शामिल होने के दावे भी इस रैली में किए गए। आईएनएलडी के राष्ट्रीय महासचिव अभय चौटाला ने यह दावा किया था कि राकेश टिकैत इस रैली में शिरकत करेंगे। सोशल मीडिया पर जब राकेश टिकैत के आने की सूचना फैली तो इसे बस भीड़ इकट्ठा करने का फार्मूला बताया गया। राकेश टिकैत के आने की सूचना को किसानों ने खारिज कर दिया।

जींद रैली में कई बड़े नेताओं की गैरहाजिरी से तीसरे मोर्चा बनाने की मुहिम को जोरदार झटका
जींद रैली में कई बड़े नेताओं की गैरहाजिरी से तीसरे मोर्चा बनाने की मुहिम को जोरदार झटका

आईएनएलडी की जींद की रैली अपने राजनीतिक कैरियर की अहम रैली थी। वर्ष 2019 में हुए जींद विधानसभा चुनाव से पूर्व आईएनएलडी एवं चौटाला परिवार में हुई टूट के पश्चात आईएनएलडी हरियाणा में अपनी राजनीतिक वजूद की लड़ाई लड़ रही है। आईएनएलडी विधानसभा चुनाव में केवल ऐलनाबाद सीट पर ही जीत हासिल कर सकी जबकि आईएनएलडी से विभाजित जीजीपी ने प्रदेश की 10 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की और मनोहर लाल सरकार के साथ सत्ता में भागीदार बनी।

जींद रैली में कई बड़े नेताओं की गैरहाजिरी से तीसरे मोर्चा बनाने की मुहिम को जोरदार झटका

आईएनएलडी द्वारा 25 सितंबर को 35 साल पुराने इतिहास को दोहराने का प्रयास किया गया। बता दें कि 35 वर्ष पूर्व चौधरी देवीलाल द्वारा 23 मार्च 1986 को जींद की धरती पर समस्त हरियाणा सम्मेलन का आयोजन किया गया था। उस समय की केंद्र सरकार की राजीव गांधी और कांग्रेस सरकार के अनेकों विरोधी राजनीतिक दलों के नेता समस्त हरियाणा सम्मेलन में जींद पहुंचे थे। देश में सत्ता विरोधी महागठबंधन जींद की धरती से ही बना था। आईएनएलडी इसी तर्ज पर तीसरे मोर्चे की नींव रखना चाहती थी जोकि सफल होती नहीं दिखी।

आईएनएलडी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला जेल से बाहर आने के बाद से ही सक्रिय बने हुए थे। इन दिनों वे कांग्रेस व बीजेपी विरोधी तीसरे मोर्चे के गठन की दिशा में सक्रिय थे। उनके द्वारा दावा किया जा रहा था कि जींद में तीसरे मोर्चे की नींव रखी जाएगी। लेकिन इस रैली में कई बड़े नेताओं की गैरहाजिरी से उनकी मुहिम को जोरदार झटका लगा।

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