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गाँधी जी हमेशा ‘धारक को पैसे अदा करने का वचन क्यों देते है’, जानिए इसका कारण

जीवन में कई ऐसी चीजें होती है, जो की बेहद उपयोग में होती है। हमारे देश में करेंसी नोटों को छापने का कम भारत की रिज़र्व बैंक के जिम्मे है। एक रुपये के नोट को छोड़कर सभी नोटों पर RBI के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं। किसी भी नोट पर “मैं धारक को 100 या 500 रूपए अदा करने का वचन देता हूँ” जरूर लिखा होता है यह RBI के गवर्नर की शपथ होती है कि जिसके पास भी यह नोट है उसको हर हाल में उसकी लिखी गयी कीमत देने का दायित्व RBI के गवर्नर का है।

जेब में अमूमन 10-20-50 या इससे भी बड़े नोट रखें ही होते है। भारत का केन्द्रीय बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक है जो कि एक रुपये के नोटों को छोड़कर सभी मूल्यवर्ग के नोटों की छपाई करता है। एक रुपये के नोट पर भारत के वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं जबकि अन्य नोटों पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं. सन 1935 से पहले, मुद्रा छपाई की जिम्मेदारी भारत सरकार के पास थी।

गाँधी जी हमेशा ‘धारक को पैसे अदा करने का वचन क्यों देते है’, जानिए इसका कारण

आपने कभी 10-20-50, 100-500 या 2000 के नोटों को गौर से देखा है? भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 के तहत की गई थी। सौ के नोटों की गड्डी के नोट हम सभी ने देखे हैं। और सौ के ही क्यों 10 के 20 के 500 या 2000 के हर नोट पर आपको एक स्पेशल स्टेटमेंट लिखा हुआ जरूर दिखता होगा “मैं धारक को वचन देता हूँ”। बचपन से हम इसे पढ़ते आये हैं, लेकिन क्या हमें इसका मतलब पता है कि ये क्यों लिखा जाता है।

गाँधी जी हमेशा ‘धारक को पैसे अदा करने का वचन क्यों देते है’, जानिए इसका कारण

वो पैसा जो अच्छे अच्छों का ईमान हिला देता है वो खुद इतनी ईमानदारी से वचन क्यों देता है। भारतीय रिजर्व बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के आधार पर मुद्रा प्रबंधन की भूमिका प्रदान की गई थी। किसी भी नोट पर रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया यह कथन इसलिए प्रिंट करती है क्योंकि वो जितने रुपये की नोट छापती है उतने रुपये का सोना वह अपने पास रिज़र्व कर लेती है। वह धारक को ये विश्वास दिलाने के लिए यह कथन लिखती है कि यदि आपके पास सौ रुपया है तो इसका मतलब यह है कि रिज़र्व बैंक के पास आपका सौ रुपये का सोना रिज़र्व है।

गाँधी जी हमेशा ‘धारक को पैसे अदा करने का वचन क्यों देते है’, जानिए इसका कारण

भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की धारा 22; रिज़र्व बैंक को नोट जारी करने का अधिकार देती है। इसी तरह से अन्य नोटों पर भी यह लिखा होने का मतलब है कि जो नोट आपके पास है आप उस नोट के धारक है और उसके मूल्य के बराबर आपका सोना रिजर्व बैंक के पास है, और रिजर्व बैंक वो सोना उस नोट के बदले आपको देने के लिए वचनबद्ध है।

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