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विज्ञान का चमत्कार : इंसान के शरीर में धड़केगा सुअर का दिल, डॉ बरुआ का छलका दर्द मेरे साथ अत्याचार क्यों ?

अपनी तरक्की के लिए मशहूर अमेरिका ने एक और नया कारनामा कर दिया है, वहा के डॉक्टर्स ने एक मनुष्य के शरीर में सुअर का दिल ट्रांसप्लांट किया है बता दे की अमेरिका में 57 साल के डेविड बेनेट काफी समय से दिल की बीमारी से जूझ रहे थे वही डॉ. ने 7 घंटे की सर्जरी करके जेनेटिकली मोडिफाई सुअर के दिल का मनुष्य के शरीर में ट्रांसप्लांट किया है । हालांकि जिस व्यक्ति के साथ यह सर्जरी की गई वह एक हिंसक अपराधी हैं

पर वही भारत के असम के एक डॉ. ने दावा किया है उन्होंने ऐसी सर्जरी 25 साल पहले कर चुके थे हालांकि वह मरीज बच नहीं सका और चिकित्सक धनीराम बरुआ को हार्ट ट्रांसप्लांट के कानून को नजरंदाज करने के आरोप लगे थे और उनको जेल भी जाना पड़ा था जमानत के बाद उनको रिहा किया गया और उनपर आज भी यह मुकदमा चल रहा है ।

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बात 1997 की है। तब ब्रिटेन में प्रशिक्षित सर्जन डॉ बरुआ ने सूअर के दिल को इंसान में ट्रांसप्लांट किया था। यह मरीज 7 दिन ही जिंदा रह पाया था। मरीज की मौत के बाद उस समय की असम सरकार ने बरुआ को ऑर्गन ट्रांसप्लांट एक्ट का उल्लंघन करने के आरोप में जेल भेज दिया था।

विज्ञान का चमत्कार : इंसान के शरीर में धड़केगा सुअर का दिल, डॉ बरुआ का छलका दर्द मेरे साथ अत्याचार क्यों ?
विज्ञान का चमत्कार : इंसान के शरीर में धड़केगा सुअर का दिल, डॉ बरुआ का छलका दर्द मेरे साथ अत्याचार क्यों ?

जब वे 40 दिनों के बाद अपने शोध संस्थान और एनिमल फार्म में लौटे, तो उन्होंने पाया कि उन्‍हें तहस-नहस कर दिया गया था। उस अपमान की यादें और जेल में उन्हें जिस ‘यातना’ का सामना करना पड़ा, वह आज भी उन्हें परेशान करता है। उन्होंने यह भी बताया की दिल के साथ साथ और भी अंग लग सकते है क्योंकि सुअर और इंसान में बहुत सी समानताएं होती हे ।

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इससे पहले अक्टूबर, 2021 में किसी इंसान को सूअर की किडनी का सफलतापूर्व हुआ था। यह चमत्कार भी अमेरिकी डॉक्टरों ने किया था। दुनियाभर के लाखों लोग किडनी फेल्योर से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह ट्रांसप्लांट एक उम्मीद है। यह कमाल न्यूयॉर्क शहर के एनवाईयू लैंगोन हेल्थ मेडिकल सेंटर के सर्जनों ने किया था। हालांकि सर्जन इस दिशा में लंबे समय से काम कर रहे थे। डॉक्टरों ने जेनेटिकली मोडिफाइड सुअर की किडनी डोनर के रूप में इस्तेमाल की थी। इस जीन एडिटिंग को यूनाइटेड थेरेप्यूटिक्स की सहायक बायोटेक फर्म रेविविकोर ने किया था।

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