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“मेरी कहानी फिल्म वक्त की तरह ही है” महिला आयोग हरियाणा की चेयरपर्सन का बिना परिवार बीता बचपन

कहा जाता है फिल्में समाज का आईना होती हैं। समाज में घटित हुई विभिन्न घटनाएं ही फिल्मों के रूप में लोगों के सामने आती है। आज हम आपको ऐसी ही एक फिल्म का उदाहरण देंगे जिसकी स्टोरी असल जिंदगी में भी है। आप लोगों ने बलराज साहनी की फिल्म ‘वक्त’ तो देखी ही होगी। ऐसी ही कहानी असल जिंदगी में हरियाणा महिला आयोग की नवनियुक्त चेयरपर्सन रेणु भाटिया की है।

उन्होंने कहा कि “मेरी कहानी बलराज साहनी की फिल्म वक्त की तरह ही है।” बता दें कि उनका बचपन बिना मां-बाप के ही बीता। इसलिए बच्चियों और महिलाओं के साथ जो बीतती है वह उनसे ज्यादा कौन समझ सकता है। यह बातें उन्होंने बुधवार को कही। उन्होंने बताया कि उनका परिवार श्रीनगर के धनाढ़य परिवारों में से एक था। कश्मीर में डल झील के सामने उनका घर था। जब वह सात साल की थी तो सुबह 4 बजे मकान ढहने के कारण मां-बाप, ढ़ाई साल की बहन और 9 महीने के भाई की मौत हो गई थी।

“मेरी कहानी फिल्म वक्त की तरह ही है” महिला आयोग हरियाणा की चेयरपर्सन का बिना परिवार बीता बचपन
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रेणु और उनका तीन साल का छोटा भाई इस हादसे में बच गए। इसके बाद उनका और भाई का पालन-पोषण ताया और ताई ने किया। औरतों के साथ होने वाले अन्याय से भी वह भली-भांति वाकिफ हैं। जो कमजोर मिलती है तो उन्हें वह अपनी कहानी सुनाती हैं।

रेणू भाटिया पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्‌टो पर बनी फिल्म बेनजीर में अभिनय कर चुकी है। इसके अलावा दूरदर्शन के कई नाटकों में भी काम कर चुकी हैं।

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जन्मदिन पर पूरे परिवार की हो जाती है मौत

रेणू भाटिया ने बताया कि 1976 को उनके जन्मदिन के मौके पर यह हादसा हुआ था। रात को पूरा परिवार फिल्म देखकर आया था। फिल्म में सुनील दत्त ने जो गाड़ी चलाई थी वह उन्हीं की थी। इसलिए वह फिल्म देखने गए।

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फिल्म वक्त में भी बलराज साहनी का पूरा परिवार अपने बच्चे का जन्मदिन मना रहा होता है और भूंकप आने पर भयंकर हादसा हो जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी की कहानी वक्त फिल्म की कहानी जैसी ही है।

ऐसे रखा राजनीति में कदम

आयोग की चेयरपर्सन ने बताया कि 1987 में फरीदाबाद में डिप्टी सीएम मंगल सेन पहुंचे। उस समय पड़ोस में रहने वाले भाजपा विधायक कुंदन लाल भाटिया के घर आए थे। वह इससे बेखबर होकर भाजपा के झंडे तैयार करती रही थीं। तभी पीछे से आकर विधायक ने पूछा कि यह लड़की कौन है, जो इतनी लग्न से झंडे तैयार कर रही है, इसे पार्टी में शामिल कर लो।

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षड्यंत्र कर कांग्रेस ने हराया

तब उन्होंने भाजपा में दो रुपए की पर्ची कटवाकर सदस्यता हासिल की। इसके बाद वर्ष 2000 में भाजपा की टिकट पर पार्षद बनी और फरीदाबाद नगर निगम की डिप्टी मेयर के पद पर रही, वह दो बार पार्षद भी बनी।

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2010 के चुनावों में कांग्रेस ने उसे हराने के लिए उनके नाम जैसी 6 रेणु भाटिया चुनाव के मैदान में उतार दी। उन्हें 900 वोट मिल गए। जबकि वह 600 वोट से हार गई। चेयरपर्सन ने कहा कि सरकार ने जो जिम्मेदारी उन्हें दी है वह उसे बखूबी निभाएंगी।

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