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पुलिस विभाग के सामने ही मैन पावर की कमी नामक चुनौती, सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर के पद खाली

पुलिस विभाग द्वारा भले ही समाज को सुरक्षा मुहैया कराने हेतु बड़े बड़े वायदे किया जाते होंगे, लेकिन फिलहाल हरियाणा में यह फायदे खोखलें साबित हो रहे हैं। स्वयं पुलिस विभाग के सामने मैन पावर की कमी एक कमी के रूप में उभर कर सामने आ रही हैं।

जिसके चलते विभिन्न मामले थानों में लंबित पड़े रहते हैं तो वहीं इसका नकारात्मक प्रभाव पीड़ितों पर पड़ता दिखाई दे रहा है, क्योंकि इन्हें समय पर न्याय नहीं मिलने पर यह निराशाजनक चेहरे लिए घर को लौट रहे हैं। बात यही तक।सीमित नहीं रह गई है बल्कि कार्यरत कर्मियों पर वर्कलोड भी बढ़ रहा है

पुलिस विभाग के सामने ही मैन पावर की कमी नामक चुनौती, सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर के पद खाली
पुलिस विभाग के सामने ही मैन पावर की कमी नामक चुनौती, सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर के पद खाली

तो वहीं ऐसे हालात में वे तनावपूर्ण माहौल में भी रहने को मजबूर है। यहां तक कि अनेकों बार छुट्टियों पर भी कैंची चल जाती है। हालांकि अपने इन हालातों को लेकर पुलिसकर्मी बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन हालात बदलने की हर समय उम्मीद बनाए रखते हैं। बता दें कि जिला में सबसे अधिक कमी सिपाही स्तर की है, जिसके आधे से अधिक पद रिक्त पड़े हैं।

जहां बड़े स्तर पर पद अभी भी रिक्त है वहीं तैनात कर्मियों में से भी कहीं वीआइपी ड्यूटी तो कहीं कोर्ट कचहरी के केस में पुलिसकर्मी व्यस्त रहते हैं। यहीं नहीं लगातार बढ़ता अपराध भी पुलिस के लिए चुनौती बन रहा है। जानकारों की मानें तो अधिकर पुलिस वीआइपी ड्यूटी व कोर्ट केस से संबंधित कार्यो में ही व्यस्त रहती है जबकि फरियादी थानों के चक्कर लगाने को मजबूर रहते हैं। गश्त पर भी मैन पावर कम होने का असर पड़ता है, जिसका फायदा अपराधिक लोग उठा लेते हैं।

पुलिस विभाग के सामने ही मैन पावर की कमी नामक चुनौती, सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर स्तर के पद खाली

वहीं अगर इंस्पेक्टर पद की बात करें तो 26 तैनाती के साथ ही 4 रिक्तियां हैं,वजन सब इंस्पेक्टर के पद पर 92 तैनाती में से 63 पद की रिक्तियां निकाली गई हैं। वहीं सहायक सब इंस्पेक्टर के 178 में 68 के लिए रिक्त स्थान हैं। इसके अलावा मुख्य सिपाही में से 306 से हटकर 55 के लिए तो साथ ही सिपाही के स्थान पर 1072 में से 592 के लिए रिक्तियां निकाली गई हैं।

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