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हरियाणा रोडवेज को घाटे से बचाने के लिए अब शुरू हुई नई स्कीम, मशीनों से जल्द कटेगी प्रदेश भर में टिकट

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वर्तमान में रोडवेज 1900 करोड़ के घाटे में हैं। सबसे अधिक घाटा कोविड महामारी आने के बाद हुआ है। पहले यह 1000 करोड़ के अंदर ही था। ई-टिकटिंग प्रणाली पर अगले पांच साल में 40 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। अभी रोडवेज का सालाना राजस्व एक हजार करोड़ रुपये है। परिवहन विभाग की बसों में 42 श्रेणियों के लोग मुफ्त और रियायती दरों पर यात्रा करते हैं।

हरियाणा रोडवेज विभाग की ओर से भूमि जन सुविधाओं के लिए लीज पर देने का प्रस्ताव तैयार कर अब मशीनों द्वारा टिकट काटने का प्रावधान जल्द लागू किए जाना है। ऐसे में ओपन लूप ई-टिकटिंग प्रणाली से हरियाणा रोडवेज का राजस्व तीन साल में बीस फीसदी बढ़ने के साथ साथ ही 50 करोड़ रुपये की राजस्व चोरी भी रुकेगी। मार्च में छह रोडवेज डिपो और मई से पूरे प्रदेश में मशीनों से टिकट कटना शुरू हो जाएंगे।

हरियाणा रोडवेज को घाटे से बचाने के लिए अब शुरू हुई नई स्कीम, मशीनों से जल्द कटेगी प्रदेश भर में टिकट

रोडवेज को घाटे से बाहर लाने के लिए परिवहन विभाग अपने भूमि बैंक का इस्तेमाल भी करेगा। बसों पर विज्ञापन के लिए नई नीति लाई जाएगी।

विभाग की ओर से भूमि को जनसुविधाओं के लिए लीज पर देने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। नए प्रधान सचिव आईपीएस नवदीप सिंह विर्क रोडवेज को पूरी तरह पेशेवर बनाने की योजना तैयार कर रहे हैं। विर्क का दावा है कि योजना के लागू होने के छह माह बाद रोडवेज की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। एनसीएमसी यानी नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड कई तरह की लीकेज को रोकेगा।

हरियाणा रोडवेज को घाटे से बचाने के लिए अब शुरू हुई नई स्कीम, मशीनों से जल्द कटेगी प्रदेश भर में टिकट




परिवहन विभाग का जोर अब नए बस अड्डे बनाने के साथ सुविधाएं बढ़ाने पर रहेगा। वर्तमान में संचालित सभी अड्डों को साफ-सुथरा बनाया जाएगा। भूमि बैंक जनसुविधाओं के लिए इस्तेमाल होगा। जीटी रोड व अन्य जगह उपयोगी भूमि चिह्नित की जा रही है। सातों दिन चौबीस घंटे सुविधा देने वाले आउटलेट खोले जाएंगे। समय के साथ रोडवेज को और प्रभावी बनाने का खाका विभागीय अधिकारी खींच रहे हैं।

हरियाणा रोडवेज को घाटे से बचाने के लिए अब शुरू हुई नई स्कीम, मशीनों से जल्द कटेगी प्रदेश भर में टिकट



रोडवेज की बसों में मुफ्त यात्रा करने वालों के लिए विभाग ने सालाना सीमा तय की हुई है। इसके लिए कॉपी बनी है। जिसमें कंडक्टर यात्रा की दूरी व दिनांक भरते हैं, लेकिन यह गिनती कोई नहीं करता कि कॉपी धारक कितनी यात्रा कर चुका है।

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मैनुअल काम खत्म होने के बाद जब एनसीएमसी कार्ड पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगा तो ई-टिकटिंग मशीन में मुफ्त यात्रा का पूरा ब्योरा तुरंत सामने आ जाएगा। अगर मुफ्त या रियायती यात्रा की तय सीमा पूरी हो गई है तो संबंधित व्यक्ति को टिकट लेनी पड़ेगी। इससे भी रोडवेज के राजस्व में इजाफा होगा।

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