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सूरजकुंड मेले में डिजीटल प्रदर्शनी द्वारा दर्शाई गई स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के योगदान की गाथा

आजादी के अमृत महोत्सव की श्रृखंला में आयोजित 35वें सूरजकुंड शिल्प मेला में देश के स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा प्रदेश के योगदान से जुड़ी घटनाओं को डिजीटल प्रदर्शनी में अभिलेखों व तस्वीरों की जुबानी प्रदर्शित किया गया है।


हरियाणा के सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग द्वारा अभिलेखाकार विभाग के सहयोग से लगाई गई इस डिजीटल प्रदर्शनी में अंबाला के विद्रोह, हांसी व हिसार में यूरोपियंस के हत्याकांड, भिवानी में नमक कानून तोडऩे तथा हिसार के कलैक्टर वैडरबर्न की कचहरी में हत्या की घटनाओं को प्रदर्शित किया गया है, ताकि हस्तशिल्प मेला में आने वाले पर्यटक स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के योगदान के बारे में अवगत हो सके।

सूरजकुंड मेले में डिजीटल प्रदर्शनी द्वारा दर्शाई गई स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के योगदान की गाथा
सूरजकुंड मेले में डिजीटल प्रदर्शनी द्वारा दर्शाई गई स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के योगदान की गाथा




इस डिजीटल प्रदर्शनी में 10 मई 1857 को अंबाला के तत्कालीन उपायुक्त द्वारा पंजाब के मुख्य आयुक्त को एक टेलीग्राम भेजा गया था, जिसमें पांचवी व साठवीं रेजीमेंटों द्वारा 10 मई 1857 की सुबह परेड ग्राउंड में शस्त्र उठाने की रिपोर्ट दी गई है। इसी प्रकार पंजाब के तत्कालीन मुख्य आयुक्त द्वारा 5 जून 1857 को भारत सरकार के विदेश विभाग के सचिव को लिखा गया वह पत्र भी प्रदर्शित किया गया है।

जिसमें हिसार के कलैक्टर मिस्टर वैडरबर्न की कचहरी में हत्या की जानकारी दी गई है। एक अन्य घटना के रूप में 2 जून 1857 का पत्र प्रदर्शित किया गया है, जिसमें हांसी व हिसार में यूरोपियंस के हत्याकांड की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है। इसके अलावा प्रदर्शनी में 17 अप्रैल 1930 का एक गोपनीय पत्र भी प्रदर्शित किया गया है।

सूरजकुंड मेले में डिजीटल प्रदर्शनी द्वारा दर्शाई गई स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के योगदान की गाथा
सूरजकुंड मेले में डिजीटल प्रदर्शनी द्वारा दर्शाई गई स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के योगदान की गाथा



जिसमें कहा गया है कि मिस्टर के.ए. देसाई द्वारा नमक कानून तोड़ा गया। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि हिसार, हांसी व सिरसा के लोगों ने भिवानी में एकत्रित होकर बापुरी गेट के बाहर नमक बनाया। इस पत्र में पंडित नेकी राम शर्मा और गणपत राम के भाषणों में विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने का भी उल्लेख किया गया है।

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