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कंटेनमेंट जोन में टेस्टिंग में कुछ राज्य है काफी फिसड्डी, दिल्ली एंटीजन टेस्ट में सबसे आगे

भारत में कोरोना वायरस के आंकड़े दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। भारत में पिछले 24 घंटे में 40,425 कुछ आंकड़े आए हैं, और इस वायरस से कुल 625 लोगों की मौत हुई है।इस हालात में टेस्टिंग के आंकड़े और भी अधिक अहम हो जाते हैं, क्योंकि इसी से ट्रांसमिशन को रोका जा सकता है। पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है, कि अब शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में यह वायरस फैल रहा है।

पिछले कुछ दिनों के सरकारी आंकड़ों पर नजर डाले, तो पता चलता है कि बड़े-बड़े राज्य में अभी भी टेस्टिंग काफी कम हो रहे हैं,ज्यादातर राज्य RT- PCR टेस्टिंग कर रहे हैं, दिल्ली एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां रैपिड एंटीजन टेस्ट को जरूरत को सबसे पहले समझा गया, क्योंकि दिल्ली में कोरोना वायरस काफी तेजी से फैल रहा था। दिल्ली में 18 जुलाई तक 3.39 हैं एंटीजन टेस्ट किया गया है, जबकि 4.79 लाख RT- PCR जांच किया गया है।

वही सरकारी आंकड़े पर नजर डाले तो हरियाणा दूसरे नंबर पर आता है यहां पर 62,267 एंटीजन टेस्ट किया गया है, और 4.27 लाख RT- PCR टेस्ट किया गया है।

एंटीजन टेस्टिंग में महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर

सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो महाराष्ट्र में 35,713 एंटीजन टेस्ट किया गया है, जो देश में तीसरे नंबर पर आता है, तथा महाराष्ट्र में 4.52 लाख RT- PCR टेस्ट किया गया है, इसके बाद नंबर आता है पूर्वोत्तर राज्य असम का,जहां पर 25,540 एंटीजन टेस्ट 5.02 लाख RT- PCR टेस्ट किया गया है।

सबसे अधिक डराने वाले बात यह है कि जहां पर अभी नए हॉटस्पॉट बंद रहे हैं, या कोरोना वायरस के संक्रमण में वृद्धि हो रही है, वहां पर सबसे कम एंटीजन टेस्ट किया जा रहा है। तेलंगाना जैसे राज्य में मात्र 1.33 लाख RT – PCR टेस्ट किया जा रहा है,जबकि एंटीजन टेस्ट की संख्या मात्र 64 है। इसके बाद नंबर आता है राजस्थान का जहां पर सिर्फ 180 एंटीजन टेस्ट किया गया है, जबकि RT-PCR टेस्ट की संख्या 10.70 लाख है।

इसी तरह बाकी अन्य राज्यों में भी स्थिति काफी चिंताजनक है, बिहार में मात्र 1380 टेस्ट किया जा रहा है, तो पश्चिम बंगाल में 1067, गुजरात में 2802, और जबकि सबसे बड़े कोरोना के हॉटस्पॉट तमिलनाडु में मात्र 3800 टेस्ट किया जा रहा है।

वर्तमान में दिल्ली एंटीजन टेस्ट में सबसे बडे उदाहरण के तौर पर उभरा है, जहां पर कंटेंटमेंट जोन में काफी तेजी से और, प्रभावी ढंग से टेस्ट किया जा रहा है, और वायरस के प्रसार को रोकने के लिए ट्रैक का रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

एम्स दिल्ली में एमडी कम्युनिटी मेडिसिन के पीएचडी स्कॉलर और संक्रामक बीमारी विशेषज्ञ गिरधर गोपाल ने कहा है कि, दिल्ली में टेस्टिंग संख्या को RT- PCR/ रैपिड एंटीजन टेस्ट में बांटकर देखने की आवश्यकता है, और इसी तरह सिंप्टोमेटिक/ एसिंप्टोमेटिक में किए गए टेस्ट, सिंप्टोमेटिक और एसिंप्टोमेटिक में पॉजिटिव दर, रैपिड टेस्ट में नेगेटिव पाए गए, कितने लोग RT – PCR टेस्ट में पॉजिटिव निकले।

इस तरह के लोगों को गौर करने की जरूरत है ताकि वायरस ना फैले।उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत में कोरोना वायरस के टेस्ट संख्या को लेकर बहुत अधिक दबाव के बाद भी, ICMR ने राज्य को अपने टेस्टिंग बढ़ाने के लिए कहा है। ICMR पहले ही दो बार कह चुका है कि, वायरस के प्रसार को रोकने के लिए – “टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट” रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है, ताकि इस वायरस के संक्रमण से निपटा जा सके। साथ ही कंटेनमेंट जोन में अनुमोदित point-of-care टेस्ट का उपयोग किया जाना चाहिए।

ICMR ने राज्य को टेस्टिंग बढ़ाने का दिया निर्देश

डॉक्टर गिरधर गोपाल iCART के सह संस्थापक है है, जो जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा एनालिटिक्स से संचालित कोविड-19 रिसर्च एनालिटिक्स प्लेटफार्म है।ICMR ने अपने गाइडलाइंस में कहा है कि, सभी राज्यों को कोरोना वायरस एंटीजन टेस्ट में निगेटिव आने वाले सभी सिंप्टोमेटिक लोगो का RT – PCR मशीन पर दोबारा टेस्ट किया जाए, जिससे कि गलत नेगेटिव टेस्टिंग के मुद्दों से निपटा जा सके।

Written by – Ankit Kunwar

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