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मैं फरीदाबाद हूँ मेरा प्रशासन अंधा बना हुआ है, जनता की नहीं वो खुद की सुनता है

मैं फरीदाबाद हूँ करोड़ों लोग मेरी जमीन पर रहते हैं, मुझसे बहुत सी अपेक्षाएं रखते हैं, लेकिन मेरा प्रशासन मेरी जनता की परवाह नहीं करता, गरीबों की परवाह नहीं करता | महामारी से इस समय मैं और मेरा देश भारत दोनों लड़ रहे हैं, लेकिन मेरी जमीन पर कुछ सरकारी अधिकारी इस समय सिर्फ पैसा कमाने में, भ्रष्टाचार करने में, खुद का पेट भरने में लगे हुए हैं |

सावन के महीने में यूँ तो मेरा देश और मेरी जनता शिव की पूजा करती है, लेकिन शिव पूजा के साथ – साथ मेरी जमीन पर रहने वाले लोग अपने चिरागों को खो देते हैं | कारण होता है फरीदाबाद नगर निगम की लापरवाही | बारिश के मौसम में स्मार्ट सिटी कहने वाली मेरी जमीन तालाबों सी नज़र आती है |

मैं फरीदाबाद हूँ मेरा प्रशासन अंधा बना हुआ है, जनता की नहीं वो खुद की सुनता है

मेरी जमीन पर जो सड़कें हैं वो बस कहने को है, सड़कों के बीचों – बीच अनेकों कुँए समान गड्डे बने हुए हैं, जिसके कारण उनमें पानी भरने से दुर्घटना होती है और बहुत से परिवारों को अपना चिराग खोना पड़ता है | सरकार पैसा तो खूब देती है बारिश में पानी निकासी के लिए, सड़क निर्माण के लिए परंतु सड़कों का निर्माण तो नहीं होता, लेकिन सरकारी अधिकारीयों के मकान ज़रूर बन जाते हैं |

कहानी तो बहुत लंबी है मेरी, ऐ दोस्त लेकिन सुन ने वाला कोई नहीं | विधायक, सांसद, पार्षद सभी चुप रहते हैं नगर निगम के घोटालों पर क्यों ये न मान लिया जाय की ये सब भी मेरी जमीन को नोचने में मेरे लोगों को नोचने में शामिल हैं | कोरोना ने घर पर रहना तो सिखाया है, लेकिन फरीदाबाद प्रशासन ने घर पर मजबूरी में रहना सिखाया है दोनों बातों में अंतर हैं ध्यान से समझियेगा मेरे दोस्त |

मैं फरीदाबाद हूँ मेरा प्रशासन अंधा बना हुआ है, जनता की नहीं वो खुद की सुनता है

मेरे शहर की हर मार्किट पानी से लबालब भर जाती है, चलो मार्किट को साइड करो | लेकिन मेरे शहर की सभी सब्ज़ी मंडियों में जाना बारिश के मौसम में बीमारी को न्योता देने वाली बात है | मेरे शहर की कुछ प्रमुख सब्जी मंडियां जहाँ जाना दुश्वार है |

  1. डबुआ सब्जी मंडी – मेरी जमीन पर डबुआ सब्जी मंडी का नाम हर शख्स जानता है, कारण है कि इसी मंडी पर मेरे शहरवासी सब्जी के लिए निर्भर रहते हैं | लेकिन पानी निकासी का ठीक बंदोबस्त नहीं होने और सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने से सब्जी मंडी जलभराव और गंदगी के ढेर में तब्दील हो जाती है। इस कारण मंडी में ग्राहकों का पहुंचना मुश्किल हो जाता है और मेरी जनता को कभी – कभी बिना सब्जी के भोजन खाए सोना पड़ता है |
  2. ओल्ड फरीदाबाद सब्जी मंडी – सेक्टर वासियों पर तो महामारी के साथ – साथ बारिश की भी मार इस साल पड़ रही है | कोई ऐसा सेक्टर नहीं होता जहाँ घुटनों तक बारिश के मौसम में पानी न भरता हो | ओल्ड फरीदाबाद की मंडी सेक्टर वासियों के लिए बहुत महवत्पूर्ण है | लेकिन बारिश के मौसम में यहाँ जाना बीमारी को घर लाना होता है | कीचड से भरी सड़कें, गंदगी भरा पानी यहाँ सबकुछ देखने को मिलता है | सब्जी लेने आयी सभी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है |
  3. सेक्टर 16 मंडी – पीडब्ल्यूडी का कार्यालय सेक्टर 16 में पड़ता है, लेकिन एक बार बारिश आजाय फिर तो सेक्टर 16 कम और नदी ज़्यादा लगता है सेक्टर 16 | इस मंडी में फल ज़्यादा बिकता है | कोरोना काल में फल खाना सेहत के लिए अच्छा है, लेकिन गंदगी जहाँ हो वहां से फल लाना क्या लाभ ? मंडी में बारिश के मौसम में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे रहते हैं | बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था पूरी तरह चौपट है |
  4. सेक्टर 7 मंडी – ये मंडी तो बारिश के मौसम में पूरी तरह नारकीय बन जाती है | गंदगी इतनी होती है यहाँ की सांस लेना दुश्वार हो जाये | कीचड़ से न जाने कितने लोग फिसल कर गिर जाते हैं |
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बल्लभगढ़ की सब्जी मंडी हो या एनआईटी 5 की, सभी सब्जी मंडियों में बारिश के पानी की निकासी न होने तथा एक जगह इकट्ठा रहने से उसमें मच्छर पनप जाते हैं | किसी मंडी में कोई व्यवस्था नहीं है | जो सब्जी आप खाते हैं वे पूरा दिन कीचड़ में इन मंडियों में पड़ी रहती है | चरों तरफ गंदगी और मच्छरों के बीच फल, सब्जी पड़े रहते हैं और वही आप खाते हैं | यह सब सेहत पर बहुत नुक्सान पंहुचा सकता है |

बारिश के मौसम में नगर निगम के अधिकारी चाय – पकोड़े तो बहुत चाव से खाते होंगे, लेकिन एक बार भी गरीबों के हाल के बारे में नहीं सोचते होंगे | उनके पास तो पैसा है जनता का बड़े – बड़े स्टोर में जाके सब्जी ले लेंगे, लेकिन मेरी आम जनता का ये अधिकारी कभी नहीं सोचते | प्रशासनिक उपेक्षा के चलते सब्जी मंडिया गंदगी के ढेर में बदल जाती हैं | दुकानों के सामने गंदगी के ढेर लगे रहते हैं, जिनकी महीनों तक सफाई नहीं की जाती है |

मैं फरीदाबाद हूँ मेरा प्रशासन अंधा बना हुआ है, जनता की नहीं वो खुद की सुनता है

बारिश के गंदे पानी, कीचड़ से सेहत पर बहुत प्रभाव पड़ता है | सबसे खतरनाक होते हैं बारिश के पानी में पनपने वाले कीड़े व मच्छर जो सब्जी, फल पार आके बैठ जाते हैं | बारिश के मौसम में जलजनित रोगों का प्रकोप होता है साथ ही जठराग्नि शिथिल हो जाने से बहुत ही जल्दी पेट खराब भी होता है | त्वचा के रोगों के साथ-साथ मलेरिया, डेंगू, वायरल फीवर, टायफाइड जैसी बीमारियां भी शरीर पर डेरा डाल लेती हैं | घर के आसपास पानी जमा हो जाने से मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की बस्तियाँ पनप जाती हैं |

मैं फरीदाबाद हूँ मेरा प्रशासन अंधा बना हुआ है, जनता की नहीं वो खुद की सुनता है
मैं फरीदाबाद हूँ मेरा प्रशासन अंधा बना हुआ है, जनता की नहीं वो खुद की सुनता है

प्रशासन को अपने लिए नहीं जनता के लिए काम करना चाहिए | सब्जी मंडियों में हफ़्तों तक पानी भरा रहता है | इस से बहुत सी बीमारियां हो सकती हैं | जलजनित रोगों में सबसे अहम है पीलिया | बारिश के मौसम में ड्रेनेज का पानी पेयजल की पाइप लाइन में पहुँच जाता है | इससे हेपेटाइटिस ‘ए’, ‘बी’, तथा ‘ई’ वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है | आमतौर पर लोग पीलिया को बहुत गंभीरता से नहीं लेते |

नगर निगम फरीदाबाद के अधिकारीयों को इस समय सिर्फ अपने बच्चो के पेट का ख्याल नहीं जनता की समस्याओं का ध्यान भी रखना चाहिए | एक दिन में में न जाने नगर निगम अधिकारी रिश्वत खाते होंगे, लेकिन काम कुछ नहीं करते | फरीदाबाद प्रशासन के अधिकारीयों को गरीबों की बदुआ जब लगेगी तब सब कुछ निकल जाएगा उनका, क्या पता उनकी संतान ही प्रभु को प्यारी हो जाये, क्यों की गरीबों की बदुआ व्यर्थ नहीं जाती | फरीदाबाद प्रशासन अंधा बना हुआ है |

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