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राम मंदिर नींव के लिए पाक को चकमा दे इस तरह भारत पहुंची शारदा पीठ की मिट्टी

राम मंदिर नींव के लिए पाक को चकमा देकर कुछ इस तरह भारत पहुंची शारदा पीठ की मिट्टी राम मंदिर के आधारशिला की लड़ाई लंबे समय से लड़ने के बाद आखिर अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर को लेकर बुधवार को ना सिर्फ राम मंदिर बल्कि पूरे भारत में दीप प्रज्वलित किए गए। गौरतलब बुधवार को राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिसमें पूरे विधि विधान से भूमि पूजन करने के लिए मुख्य अतिथि के तौर पर देश के प्रधानमंत्री पीएम नरेंद्र मोदी ने शिरकत की थी।

इस भूमि पूजन के गवाह कई प्रतिष्ठित लोग ही नहीं बने बल्कि पूरा देश बना, क्योंकि मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे देश ने इस आधारशिला की नींव रखते हुए देखा गया था। वही राम मंदिर के लिए रखी गई नीव के लिए देश के अलग-अलग भागो से लाए गए मिट्टी और नदियों के जल भी डाले गए थे।आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मिट्टी में पाकिस्तान के कब्जे वाले पीओके में स्थित शारदा पीठ की मिट्टी भी शामिल हुई थी।

राम मंदिर नींव के लिए पाक को चकमा दे इस तरह भारत पहुंची शारदा पीठ की मिट्टी

आसान नहीं था शारदा पीठ से मिट्टी लाना

आपको बता दें कि पी ओ के स्थित हिंदुओं के पवित्र तीर्थ स्थल शारदा पीठ की मिट्टी भी राम मंदिर की नींव में डाली गई। हालांकि पीओके की मिट्टी को लाना इतना आसान नहीं था और उसके लिए एक व्यक्ति ने बड़ा खतरा मोल लिया। पीओके में किसी भारतीय को जाने की इजाजत नहीं है, ऐसे में चीन में रहने वाले कर्नाटक के वेंकटेश रमन को उनकी पत्नी के साथ पीओके भेजा गया।

दंपत्ति को चीन के पासपोर्ट के साथ हांगकांग के रास्ते पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद भेजा गया। यहां से पति-पत्नी शारदा पीठ तीर्थ स्थल पर पहुंचे और फिर वहां की मिट्टी लेकर हांगकांग के रास्ते दिल्ली आ गए। यहां उन्होंने शारदा पीठ से जुड़े अंजना शर्मा नाम के एक व्यक्ति को मिट्टी सौंप दी। शर्मा फिर मिट्टी लेकर अयोध्या पहुंचे और आधारशिला में शामिल करने के लिए दे दिया।अयोध्या पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया।

इसके साथ ही शर्मा अपने साथ कर्नाटक के अंजना पर्वत, जिसे राम भक्त हनुमान का जन्म स्थान माना जाता है, वहां से भी पवित्र जल लाए।

बता दें कि शारदा पीठ करीब 5,000 साल पुराना मंदिर है, जिसे सम्राट अशोक के शासनकाल में स्थापित किया गया था। यह मंदिर कश्मीरी पंडितों के तीन प्रसिद्ध पवित्र स्थलों में से एक है। हालांकि यह मंदिर अभी पीओके में है और यहां भारतीयों को जाने की इजाजत नहीं है।

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