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भारतीय सिद्धांतों को अपनाने और लागू करने में योगदान दें सभी विश्वविद्यालय – मुकुल कानिटकर

हरियाणा उच्चतर एवं तकनीकी शिक्षा के महानिदेशक श्री अजीत बालाजी जोशी ने शिक्षा एवं व्यवस्था में भारतीयकरण के विचार को संस्थागत बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारतीयकरण एक व्यापक संकल्प है,

जिसके लिए इस दिशा में कार्य कर रही संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीयकरण के विचार को विश्वविद्यालय स्तर पर अपनाने के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग प्रतिबद्ध है।

श्री जोशी आज भारतीय शिक्षण मण्डल और जे.सी. बोस विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘वर्तमान युग में भारतीयता की पुनर्स्थापना’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय  ई-सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सत्र में भारतीय शिक्षण मंडल के संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर मुख्य वक्ता तथा जे.सी. बोस विश्वविद्यालय केे कुलपति प्रो. दिनेश कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

श्री जोशी ने कहा कि भारतीयत्व एक ऐसा विषय है, जिस पर हमेशा दबी जुबान में बातें होती रही है, लेकिन अब समय है कि इस विषय पर खुलकर बात की जाये। उन्होंने कहा कि भारतीयत्व के संकल्प के साथ लागू की गई नई शिक्षा नीति के बाद यह देखना अहम हो गया है कि इस विचार को संस्थागत रूप से कैसे अपनाया जाये।

हरियाणा के राखीगढ़ी में सिंधू घाटी सभ्यता के अवशेषों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब तक भारतीयों के संबंध में आर्यन इनवेजन थ्योरी को लेकर बात की जाती थी, लेकिन राखीगढ़ी में सिंधू घाटी सभ्यता के अवशेषों ने इस बात को प्रमाणित किया है कि भारतीय सभ्यता का विकास को सरस्वती-सिंधू घाटी सभ्यता से जोड़कर देखा जाना चाहिए जोकि 8 हजार साल पुराना इतिहास है और इस विषय को वैज्ञानिक तरीके प्रस्तुत करने और विभिन्न मंचों पर रखने की आवश्यकता है।

सम्मेलन में अपने मुख्य वक्तव्य में मुकुल कानिटकर ने जीवन के प्रत्येक अंग में परम्परा के रूप में भारतीयता को पुनस्र्थापित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जब तक हम अपने अंदर भारतीयत्व को जागृत नहीं करते, तब तक हम संस्थागत भारतीयता को नहीं प्राप्त कर सकते। व्यवस्था में भारतीयत्व को स्थापित करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को चरित्र से भारतीय होना होगा।

श्री कानिटकर ने वर्ष 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण, वर्ष 2015 में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस तथा वर्ष 2020 में नई शिक्षा नीति और श्रीराम मंदिर की आधारशिला की घटनाओं को भारतीयता की पुनस्र्थापना की दिशा में ऐतिहासिक पल बताया।

मुकुल कानिटकर ने भारतीयता के सिद्धांतों के नौ सूत्रों एकात्मदृष्टि, विविधता का सम्मान, दिव्यत्व प्रगटन, ईष्वरनिष्ठा, समुत्कर्ष, सामूहिक चरित्र, पारिवारिक मूल्य, दायित्वबोध और शास्त्रीय जीवनदृष्टि का उल्लेख करते हुए प्रत्येक पर विस्तृत चर्चा की तथा इन सूत्रों को समझकर लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल के रिसर्च फार रिसर्जेंस फाउंडेशन का उद्देश्य इन सिद्धांतों को लेकर भारतीयता को लागू करने पर केन्द्रित है,

जिसके लिए देश के विश्वविद्यालयों प्रत्येक सिद्धांत को परियोजना के रूप में लेकर कार्य कर सकते है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि भारत में वैज्ञानिक शोध और शैक्षणिक गतिविधियां तब से विद्यमान है, जब पश्चिमी देशों का अस्तित्व भी नहीं था। विश्व को संस्कृत भाषा, ज्यामिती, शून्य और आयुर्वेद जैसी अनेक खोज भारत ने दी है। कोरोना काल में रोग प्रतिरोधकता को बढ़ने में आयुर्वेद का अहम योगदान रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में भारतीयता की पुनर्स्थापना के लिए प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा आधुनिक उन्नति में इसके योगदान को समझाने और इस पर शोध की आवश्यकता है।इससेे पहले सम्मेलन केे संयोजक प्रो. ऋषिपाल ने सम्मेलन उद्देश्यों तथा इसके विषयों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की।

भारतीय शिक्षण मंडल के प्रांच सचिव सुनील शर्मा ने शिक्षा मंडल का परिचय एवं कार्यों के बारे में जानकारी दी। भारतीय शिक्षण मंडल के अनुसंधान प्रकोष्ठ के सह प्रमुख डाॅ. आशीष पांडेय ने रिसर्च फार रिसर्जेंस फाउंडेशन के एजेंडे पर चर्चा की।

जे.सी. बोस विश्वविद्यालय डिप्टी डीन रिसर्च तथा सम्मेलन के संयोजक डाॅ. राजीव साहा ने सत्र के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव रखा। उन्होंने बताया कि दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर से लगभग 250 प्रतिभागी से ज्यादा हिस्सा ले रहे है। सम्मेलन केे विभिन्न 12 तकनीकी सत्रों में 68 शोध पत्र प्रस्तुत किये जायेंगे। इसके अलावा, सम्मेलन केे उपविषयों पर चर्चा के लिए पांच प्लेनरी सत्र आयोजित किये जायेंगेे, जिसकी अध्यक्षता विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति करेंगे,

जिसमें श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय से राज नेहरू, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय नोएडा से प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र से डाॅ. बलदेव सिंह धीमान, एसवीवाईएसए विश्वविद्यालय बेंगलूरू से प्रो. रामचंन्द्र भट्ट और इग्नू नई दिल्ली से प्रो. नागेश्वर राव शामिल हैं। प्लेनरी सत्र को भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय अनुसंधान प्रमुख प्रो. बी.ए. चोपड़े ने भी संबोधित करेंगे।

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