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शाहीन बाग के मुख्य आयोजक शहजाद अली हुए BJP में शामिल किया ये बड़ा खुलासा

एक समय ऐसा था जब पूरे देश में दिल्ली का शाहीन बाग़ चर्चा का विषय बना हुआ था क्योंकि लोगो की नजर में वो एक ऐसा स्थान बन गया था जिसमे से देश की आधी आवाम को देशद्रोह की बू आने लगी थी इसपर सियासतो का दौर खूब चला था और यह इस नागरिकता संसोधन कानून की लड़ाई का गढ़ बन गया है

लेकिन अब एक अलग ही रूप रेखा सुनने और देखने को मिल रही है भाजपा ने रविवार को कहा कि शाहीन बाग के कई मुस्लिम निवासी, जहां महीनों से नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया था, पार्टी में शामिल हो गए हैं

दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि समुदाय के 100 से अधिक लोग पार्टी में शामिल हुए हैं क्योंकि वे समाज के हर वर्ग तक पहुंचने और ट्रिपल तालक को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों का समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा ये लोग भाजपा के हर किसी तक पहुंचने के प्रयासों से प्रभावित थे और खुद को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल नहीं होना देना चाहते थे.

शाहीन बाग दिल्ली के शाहीन बाग के सामाजिक कार्यकर्ता शहजाद अली भाजपा में शामिल हो गए हैं। शहजाद अली ने दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता और श्याम जाजू की उपस्थिति में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

शाहीन बाग में हुए प्रदर्शन के एक प्रमुख आयोजक शहजाद अली ने 16 अगस्त को भाजपा ज्वाइन कर ली। सरकार विरोधी मंच से सीधे सत्तारूढ़ दल में शामिल होने की उनकी कोशिश को अलग-अलग नजर से देखा जा रहा है।

प्रश्न- शहजाद अली, आप शाहीन बाग धरने के प्रमुख आयोजकों में से एक थे।सरकार विरोधी मंच से उठकर आप सीधे भाजपा में ही क्यों शामिल हुए ?


पहली बात तो यह कि आंदोलन के मंच से सीधे भाजपा में नहीं आया हूं। बीच में लंबा समय गुजरा है, जिसमें मैंने काफी कुछ सोचा-समझा है। मैंने देखा है कि किस तरह भोले-भाले लोगों के एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को विभिन्न लोगों ने अपनी-अपनी राजनीति चमकाने के लिए इस्तेमाल किया है।

इस बीच मैंने यह भी देखा है कि किस तरह सरकार की योजनाओं में किसी के साथ धार्मिक आधार पर कोई भेदभाव नहीं हुआ है। सरकार की योजनाओं का जितना लाभ हिंदू भाइयों को मिल रहा है, उतना ही हमारे मुस्लिम भाइयों को भी मिला है। ऐसे में मुझे लग रहा है कि इस मामले में राजनीति ज्यादा हुई है, जबकि सच्चाई कुछ और थी। मुसलमानों को यह सच्चाई समझने की जरूरत है।

प्रश्न- अब भाजपा से जुड़ने के बाद आप नागरिकता कानून को किस प्रकार लेते है ? क्या अब आप मानते हैं इसमें मुसलमानों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया है?

देखिए, आंदोलन की शुरुआत से ही एक बात बिलकुल स्पष्ट थी। हम केवल यह कह रहे थे कि सरकार की तरफ से कोई हमारे पास आये। हमसे बात करे, हमारे सवालों के जवाब दे। अगर हम गलत भी हैं तो हमारी गलतफहमियां दूर करे। हम आज भी वही काम करेंगे। हमारे जो भी सवाल होंगे, वे हम सीधे अपने नेताओं से, अपनी सरकार से करेंगे।

प्रश्न- आपको ऐसा नहीं लगता कि शाहीन बाग के प्रमुख चेहरे रहने के बाद अब भाजपा में शामिल होने पर लोग आपसे सवाल करेंगे, आपकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाएंगे?

आजादी से लेकर आज तक मुसलमानों के मन में सिर्फ एक ही बात बिठाई गई है कि आरएसएस-भाजपा (बाद में गठित) उनकी दुश्मन है। लेकिन हमारा कहना है कि कोई हमारा दोस्त है या दुश्मन,

यह हम दूर से देखकर तो नहीं समझ सकते। सच्चाई जानने के लिए हमें उसके करीब जाना पड़ेगा। मैंने वही काम किया है। आज भी मैं उन्हीं जमीनी मुद्दों को उठाऊंगा, जिन्हें लेकर हमेशा से मेरी प्रतिबद्धता रही है।

प्रश्न- चर्चा है कि महमूद प्राचा जैसे कुछ लोग एक बार फिर शाहीन बाग का प्रदर्शन आयोजित कराने की तैयारी कर रहे हैं। अगर यह आंदोलन दुबारा शुरू होता है, तो आपकी भूमिका क्या रहेगी?

हां, मुझे भी जानकारी है कि कुछ लोग दोबारा प्रदर्शन आयोजित कराने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ये वही लोग हैं जिनके साथ दो आदमी भी नहीं हैं। उनकी असलियत भी देश के सामने आ चुकी है। मुझे लगता है कि आपको जो भी सवाल करने हैं, वह व्यवस्था के एक अंग बनकर कीजिये। मैं पूरे देश से लाखों लोगों को भाजपा के साथ जोडूंगा। जो भी मुद्दे होंगे, पार्टी नेताओं के बीच उठाऊंगा।

प्रश्न- पुलिस का कहना है कि इन प्रदर्शनों के पीछे से दिल्ली दंगे की साजिश रची गई। पुलिस दिल्ली दंगों की जांच कर रही है।

मुझे लगता है कि यह काम पुलिस और अदालतों के ऊपर छोड़ देना चाहिए। वे इसकी ज्यादा बारीक तहकीकात कर रहे हैं और वही ज्यादा अच्छी तरह बता सकते हैं कि इसके पीछे सच्चाई क्या थी, और साजिश क्या थी।

लेकिन मैं इतना अवश्य कहूंगा कि इस प्रदर्शनों के पीछे कई लोग ऐसे रहे, जिन्होंने अपना राजनीतिक हित साधने की कोशिश की, भोले-भाले लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। बाकी का काम पुलिस और अदालत का है। इससे ज्यादा मैं कुछ और नहीं कह सकता।

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