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फरीदाबाद और गुरुग्राम में परीक्षा केंद्र बनने पर छात्रों ने जताया विरोध

पूरे देश में कोरोना संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है। महामारी के चलते जन जीवन मुश्किल में पड़ा नज़र आ रहा है। कोरोना के कहर ने पुरे विश्व में त्राहिमाम मचा रखा है। भारत की अर्थव्यवस्था जर्जर करने के साथ माहमारी ने विद्यार्थियों के भविष्य पर भी प्रश्न चिह्न लगादिया है।

कोरोना वायरस के हवाले से संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) और राष्ट्रीय योग्यता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को स्थगित करने की याचिका सोमवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज करदी गई है। इसका कारण कोरोना महामारी के मद्देनजर विभिन्न वर्गों का अलग-अलग नजरिया है।

एक तरफ इसे छात्रों के भविष्य के लिए महत्तवपूर्ण बताया जा रहा है तो दूसरी तरफ इसके विरोधी आपदा में छात्रों की मुश्किलों का हवाला देकर इसे रुकवाने के लिए जीतोड़ प्रयास भी किये जा रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि इस समय में सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम निंदनीय है। इस बार प्रवेश परीक्षा का जिम्मा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ( NTA ) ने लिया है।

13 सितंबर को राष्ट्रीय योग्यता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) का आयोजन किया जाएगा। इसी के चलते हरियाणा में जहां पहले प्रवेश परीक्षा के लिए 30 सेंटर बनाये गए थे अब उनमे 10 नए परीक्षा केंद्रों का इजाफा किया गया है। यह सभी केंद्र गुरुग्राम और फरीदाबाद में बनाए जाएंगे।

फरीदाबाद और गुरुग्राम में परीक्षा देने से नाखुश हैं विद्यार्थी

प्रवेश परीक्षा के लिए नामांकन करवा चुके छात्र अपने सेंटर से नाखुश नज़र आ रहे हैं। छात्रों का कहना है कि गुरुग्राम और फरीदाबाद में कोरोना महामारी अपने चरम पर है। ऐसे में इन क्षेत्रों में आकर परीक्षा देना खतरे से खाली नहीं है। साथ ही साथ इन क्षेत्रों से दूर रहने वाले छात्रों को यातायात के दौरान संक्रमण के फैलने का डर सता रहा है।

हरियाणा में इस साल 16,298 विद्यार्थी नीट की परीक्षा देंगे जबकि पिछले साल राज्य में 14,686 विद्यार्थियों ने यह परीक्षा दी थी। साथ ही साथ संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) का भी 1 से 6 सितंबर के बीच आयोजन किया जाएगा। जेईई परीक्षा में कुल 24,763 विद्यार्थी भाग लेंगे। आपको बता दें कि परीक्षा का पहला चरण इस साल जनवरी के महीने में आयोजित किया जा चुका है जिसमे 22,350 विद्यार्थिओं ने हिस्सा लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा आयोजन के खिलाफ खड़े विद्यार्थियों की याचिका खारिज करदी है। इस मामले में राजनीति भी जोर पकड़ रही है। देखना लाज़मी होगा कि अब इस विषय पर सरकार द्वारा क्या कदम उठाए जाएंगे।

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