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पंचायत दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने जो संदेश दिया फरीदाबाद की ग्राम पंचायतें पहले से ही किस प्रकार कर रही है उसका पालन

प्रत्येक वर्ष 24 अप्रैल को भारत देश में राष्ट्रीय पंचायत दिवस मनाया जाता है। 1992 के संविधान के (73वें संशोधन) अधिनियम 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ था और तब से पंचायतीराज के तहत गांव, इंटरमीडिएट और जिलास्तर पर पंचायतें संस्थागत बनाई गई हैं। राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस जमीनी स्तर से राजनीतिक शक्ति के विकेंद्रीकरण के इतिहास को बताता है। पंचायत व्यवस्था मुख्यत ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलती है। प्रत्येक वर्ष 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा इस दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाता है जिसे इस वर्ष कोरोना के संकट काल की वजह से टाल दिया गया है।

इस अवसर पर देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश के ग्राम पंचायत के सरपंचों के साथ बैठक की जिसमें उन्होंने कई विषयों पर चर्चा की ओर बैठक के दौरान कई अहम संदेश भी सरपंचों को दिए जिनके द्वारा वे अपने ग्रामीण क्षेत्रों में लॉक डाउन के नियमो का पालन करवा सके और इस महामारी से लड़ते हुए प्रधानमंत्री ने आत्म निर्भरता का संदेश भी इस कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दिया।

बात की जाए हरियाणा के फरीदाबाद जिले की पंचायत व्यवस्था की तो इसका एक बेहतर उदाहरण लॉक डाउन के दौरान देखने को मिला जो शहरी क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों के लिए एक संदेश है। लॉक डाउन के दौरान फरीदाबाद जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत की सूझबूझ से ग्रामीण लोगों द्वारा लॉक डाउन के पहले दिन से ही सभी सुरक्षा नियमों को अपनाया गया और इस महामारी से लड़ने में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सभी दिशा निर्देशों की पालना का संदेश पंचायत द्वारा दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों से कुछ ऐसी तस्वीर भी सामने आई जिसमें ग्रामीण लोगों ने स्वयं ही अपने गांव की सीमा को पूर्ण रूप से सील किया और इस लॉक डाउन में दौरान बगैर किसी कार्य से गांव की सीमा न लांगने के प्रण लिया।

इसी के चलते आज पंचायत दिवस के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पंचायत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की बात कही ओर इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश को समाजिक दूरी के मायने को 2 गज दूरी का संदेश देते हुए स्पष्ट किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने देशभर के कई सरपंचों से बात की जिन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि वह किस प्रकार अपने अपने ग्रामीण क्षेत्रों में नियमों का पालन करवा रहे हैं।

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