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रेलवे किनारे झुग्गियों के टूटने से फरीदाबाद में कुछ इस प्रकार होगा विकास कार्य

भारत में कोरोना काल के दौरान बड़े – बड़े फैसले लिए गए हैं। गत दिनों की बात करें तो सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तीन महीने के भीतर दिल्ली-एनसीआर में 140 किलोमीटर लंबी रेल पटरियों के आसपास की लगभग 48,000 झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने का आदेश दिया है। यह आदेश फरीदाबाद में भी लागू होगा। इस आदेश से फरीदाबाद में अटके विकास कार्यों को रफ़्तार मिलेगी।

फरीदाबाद में रेलवे किनारे झुग्गियों के कारण चौथी लाइन का काम प्रभावित हुआ है। कोर्ट ने जो फैसला दिया है अगर उस पर काम हुआ तो जिले में विकास होना तय माना जा रहा है।

ख़बरों के अनुसार, फरीदाबाद में चौथी लाइन बिछाने के प्रस्ताव को वर्ष 2007 में ,मंजूरी मिल गई थी एवं ऐसा कहा गया था कि इस काम को 5 वर्षों में पूर्ण किया जाएगा। लेकिन रेलवे की जमीन पर झुग्गियों के होने से आज तक काम नहीं हो सका है।

सुप्रीम कोर्ट को यूँ ही सुप्रीम नहीं कहा जाता ऐसा इसलिए कहा क्योंकि कोर्ट जोर देकर ये भी कहा कि रेलवे लाइन के आसपास अतिक्रमण हटाने के काम में किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव और दखलंदाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा कि रेलवे लाइन के आसपास अतिक्रमण के संबंध में अगर कोई अदालत अंतरिम आदेश जारी करती है तो वो प्रभावी नहीं होगा।

फरीदाबाद में बहुत सी कॉलोनियां रेलवे किनारे बसी हैं जिनमें यह शामिल हैं। इंद्रा नगर, राम नगर, ऐसी नगर, कृष्णा कॉलोनी, संजय कॉलोनी, संत नगर, एवं और भी। यहाँ जनता ट्रैक पर आवागमन करती है और अक्सर हादसों का शिकार हो जाती है।

रेलवे लाइन पर लोग क्रिकेट खेलते हुएनज़र आ जाएंगे। फरीदाबाद में कोरोना और अतिक्रमण बहुत रफ्तार से बढ़ रहा है। नगर निगम के अधिकारीयों की नींद उठने का नाम नहीं ले रही। एनआईटी हो या सेक्टर सभी जगह लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है।

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