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हरियाणा का यह गांव आर्य सभ्यता की जन्मस्थली माना जाता है, मोदी सरकार बनाने जा रही विश्वस्तरीय पुरातत्व स्थल

हरियाणा का यह गांव आर्य सभ्यता की जन्मस्थली माना जाता है : किसी भी राज्य के लिए उसका इतिहास सबसे बड़ा हतियार होता है। हरियाणा में स्थित राखीगढ़ी गांव जल्द ही दुनिया के नक्शे में अपनी नई पहचान में दिखेगा। इस गांव के नीचे जमीन में दबी करीब चार हजार साल की उन्नत सभ्यता इसे हड़प्पा से भी पुरानी सबसे बड़े पुरास्थल होने की पुष्टि कर रही है। केंद्रीय बजट में इस दुर्लभ खोज को आगे बढ़ाने के अनुमोदन के बाद पूरे इलाके को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने और सांस्कृतिक धरोहर को संजोने के काम ने रफ्तार पकड़ी है।

केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार सभी को पर्यटक को बढ़ावा देने के लिए ऐसे काम करने चाहिए। गत महीनों केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने राखीगढ़ी का दौरा कर जमीनी हकीकत जानी और अड़चनों को दूर किया।

हरियाणा का यह गांव आर्य सभ्यता की जन्मस्थली माना जाता है, मोदी सरकार बनाने जा रही विश्वस्तरीय पुरातत्व स्थल

इस गांव में जो भी आता है वह हतप्रभ हो जाता है। मंत्री का कहना है कि जल्द ही राखीगढ़ी दुनिया में अनूठी पहचान पाएगा। गांव के प्रभावित लोगों को नई जगह बसाने के साथ उनकी रोजमर्रा से जुड़ी दिक्कतों को भी ध्यान दिया जा रहा है। इस धरोहर के संरक्षण के साथ इसे ऐसा रूप दिया जाएगा जिसे देखने देश दुनिया से लोग आएं।

कुछ महीनों पहले आपने यह गांव बहुत ही चर्चा में था। देश में करीब चार हजार के आसपास साइट हैं जहां सभ्यता की निशानी मिलती है लेकिन ये हड़प्पा से पुरानी है। यहां अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रोहरी हिल्स से जुड़े पत्थर, बादकसा के लाजवर्त भी मिले हैं। उस दौर में हमारा मिस्र, इराक के सुमेर मेसोपोटामिया, आदि से गुजरात के रास्ते व्यापार था। आज भी गांव वालों के रहन-सहन में वो तमाम वस्तुएं पीढ़ी दर पीढ़ी देखने को मिल जाती हैं जो खुदाई में मिली हैं।

दशकों पहले प्रकाश में आया राखीगढ़ी गांव

किसी भी स्थल को विश्व स्तरीय बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों का साथ होना ज़रूरी होता है आपको बता दें 1963 में पहली बार निजी स्तर पर स्थानीय आचार्य भगवान देव ने जमींदोज विरासत के चिह्नों का पता लगाया। उसी दौरान झज्जर स्थित गुरुकुल के निजी संग्रहालय में यहां से निकले सिक्के और वस्तुएं आदि रखी गई है। भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसके महत्व को 1997 में समझा और 2000 के बीच तीन बार इस जगह खुदाई भी की।

पहचान फरीदाबाद अपने पाठकों से बहुत सी जानकारियां लेकर आता है, आपको बता दें कि कुछ समय पहले यहां खुदाई के दौरान कुछ कंकाल भी मिले थे। जिसमें दो कंकाल करीब सात फुट के हैं जिन्हें दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा गया था।

हमारे भारत में अनेकों सभ्यताएं आयी और गई हैं लेकिन आर्य सभ्यता की जन्मस्थली होने के प्रमाण समेत कई ऐतिहासिक जानकारी देने वाले राखीगढ़ी के टीले में छिपे रहस्यों को दुनिया के सामने लाने के प्रयास लगातार हो रहे हैं। राखीगढ़ी के टीलों पर बसे 152 परिवारों को हटाकर राखी खास और राखी शाहपुर गांव में बसाया जाएगा। इसके लिए सरकार ने पांच करोड़ तीन लाख रुपये का बजट जारी कर दिया है। इन परिवारों को अन्यत्र बसाने के बाद इस जगह पर खोदाई की योजना पर काम चल रहा है।

मोदी सरकार ने कुछ महीनों पहले एक फैसला लिया था जिसको पहचान फरीदाबाद आपको बता बताएगा लेकिन उस से पहले आपको बता दें, राखी गढ़ी में कई साल पहले हड़प्‍पा सभ्‍यता का खुलासा हुआ था और देश व‍ विदेश के पुरातत्‍ववेत्‍ता वहां खोदाई करवा चुके हैं और शोध कर रहे हैं। केंद्रीय बजट में इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी और यहां एक भव्‍य संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है।

अफगानिस्तान सहित सभी भारतंवासियों का डीएनए समान

यहां पर अनेकों शोध हो चुके हैं लेकिन कुछ समय पहले हुए एक शोध ने सभी को चौका दिया था। राखीगढ़ी में खोदाई से मिले हड़प्‍पाकालीन सभ्‍यता के अवशेष से यह तथ्‍य सामने आया है कि भारत से ही आर्य दुनिया के अन्य स्थानों में फैले और अफगानिस्तान सहित सभी भारतवासियों का डीएनए एक है। जेनेटिक इंजीनियरिंग के अध्ययन ने यह तथ्य को पुष्ट किेया है।

भारत से ही आर्य दुनिया के अन्य स्थानों में फैले

आपको इस बात को जानकार हैरान नहीं होना चाहिए कि आर्य भारत से ही विश्व में फैले हैं। राखीगढ़ी में हड़प्पाकालीन सभ्यता की खोदाई में मिले 6000 साल पुराने मानव कंकालों के डीएनए में साढ़े 12 हजार साल पुराना जीन मिला है उस से यह निष्कर्ष निकाला है।

यह गांव इतना इतिहास अपने में समेट कर बैठा है कि आपको बता दें राखीगढ़ी को वर्ल्ड हेरिटेज साइट (आइकोनिक साइट) की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए वह सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जो एक वर्ल्ड हेरिटेज साइट के लिए जरूरी होती हैं। उधर यूनेस्को भी उन्हीं साइट को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा देता है, जिनका स्तर पहले से घोषित वर्ल्ड हेरिटेज साइट के बराबर होता है।

भारत की सबसे पुरानी मानव सभ्यता है राखीगढ़ी

यहां पर सरकार ने बहुत से शोध किए हैं और आपको बता दें डेक्कन डीम्ड यूनिवर्सिटी पुणे के पुरातत्वविद् प्रोफेसर वसंत शिंदे के नेतृत्व में 2015 में राखीगढ़ी के आसपास 900 वर्ग मीटर में खुदाई की गई थी, जिसमें कई कंकाल और सभ्यता के अवशेष मिले थे। उस दौरान शिंदे ने दावा किया अभी तक यह माना जा रहा था कि हड़प्पा के प्रमुख नगर मोहनजोदड़ो को पश्चिमी मेसोपोटामिया (ईराक, कुवैत, सीरिया-तुर्की) के लोगों ने आकर बसाया था। जो भी शोध के दौरान गलत साबित हुई है। राखीगढ़ी में जो अवशेष मिले हैं, उनसे यह बात सामने आती है कि राखीगढ़ी सभ्यता के लोगों ने हड़प्पा, मेसोपोटामिया, ईजिप्ट आदि सभ्यताओं के निर्माण में योगदान दिया।

मोदी सरकार और मनोहर सरकार दोनों ही यहां पर अनेकों कार्य कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार इस क्षेत्र में करीब 25 करोड़ की लागत से म्यूजियम बना रही है। लगभग दो साल पहले इस क्षेत्र में म्यूजियम बनाने का काम शुरू हुआ था। जो कि इसी साल पूरा होगा। म्यूजियम आधुनिक तरीके से बनाया जा रहा है। इसमें रेस्ट हाउस, हॉस्टल और एक कैफे का निर्माण भी किया जा रहा है। ऐसे में अब राखी गढ़ी को वर्ल्ड क्लास पुरातत्व एवं पर्यटन स्थल बनाने में केंद्र सरकार की मदद ‘सोने पर सुहागा’ जैसा काम करेगी।

बहुत सी किताबों में ऐसा पढ़ने को मिल जाता है कि आर्य लोग बाहर से आकर बसे थे। मगर यह सच नहीं है। आर्य भारत के ही स्थाई निवासी थे। हिसार के नारनौंद क्षेत्र के राखीगढ़ी गांव में मिले मानव कंकालों की डीएनए रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

पहचान फरीदाबाद अपने पाठकों के लिए नई – नई जानकारियां लेकर आता है। आपको बता दें कुछ समय पहले संसद में वित्त मंत्र निर्मला सीतारमण ने बजट 2020-21 पेश करते हुए 5 पुरातात्विक स्थलों को विकसित करने की घोषणा की है। ये पांच स्थल हैं राखीगढ़ी, हस्तिनापुर, शिवसागर, धोलावीरा और आदिचनल्लूर। इन पांचों स्थलों पर ऑन-साइट म्यूजियम बनाए जाएंगे, जिससे यहां आने वाले पर्यटकों को इन जगहों का महत्व मालूम हो सकेगा।

हरियाणा में राखीगढ़ी गांव इन 5 जगहों में शामिल है जो कि हिसार जिले में है। ये जगह दिल्ली से करीब 150 किमी दूर स्थित है। राखीगढ़ी करीब 6500 ईसा पूर्व की सिंधु घाटी सभ्यता का स्थल है। भारतीय पुरातत्वविदों और डीएनए विशेषज्ञों की एक टीम ने यहां रिसर्च की थी। इस रिसर्च के दौरान की गई खुदाई में मिले कंकालों की कार्बन डेटिंग से मालूम हुआ है कि ये प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित हैं। ये जगह हिसार के पास 300 हेक्टेयर में फैली है। यहां हड़प्पा काल से जुड़ी निशानियां भी मिली हैं, जो कि लगभग 2800-2300 ईसा पूर्व की हैं।

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