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राजनीतिक पार्टियों में नेताओं के बदले सुर, अपनी ही पार्टी के खिलाफ खोला मोर्चा

राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी और मोर्चा खोलना तो नेताओं की फितरत में है। यही कारण है कि अब एक नेताओं को देख-देख दूसरे नेता भी उसकी राह पर चल पड़े है।

पिछले दिनों खुलकर पार्टी में विरोध कर चुके नारनौंद हल्के के विधायक रामकुमार गौतम के बाद अब टोहाना हल्के से विधायक देवेंद्र सिंह बबली भी उनकी राह पर चल पड़े हैं।

टोहाना विधायक विधायक देवेंद्र सिंह बबली

बबली ने खुलकर अपनी पार्टी और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वह सरेआम बयान दे रहे हैं कि सरकार में कुछ ठीक नहीं चल रहा। आज ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि सत्ता में रहते हुए भी विपक्ष जैसा माहौल बनाया जा रहा है।

कुछ इस तरह विधायक बबली ने सरकार की खोली पोल

बबली ने एक इंटरव्यू में कहा कि आज ऐसे हालात बन गए है कि अपनी विधानसभा में भी जनता की समस्या के लिए आवाज उठाने पर भी काम नहीं होता। आम आदमी के काम तो कहां होंगे, खुद विधायक के आवाज उठाने पर भी काम नहीं होता।

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्या माहौल है। वहीं आम जनता विधायक से उम्मीद करती है कि उनकी समस्याओं का समाधान होगा, लेकिन ऐसे हालात में समस्या पनपती ही है उनका समाधान नहीं हो पाता।

सीएम और डिप्टी सीएम से दो-तीन घंटे मीटिंग करने के बाद भी नहीं हुआ कोई काम

बबली ने नाम लिए बिना इशारों-इशारों में यह भी कहा कि कुछ लोग जानबूझकर कामों में अड़चन पैदा कर रहे हैं। इसको लेकर मैं डिप्टी सीएम और जजपा नेता दुष्यंत चौटाला से करीब 2 से 3 घंटे की मीटिंग कर चुका हूं। इसके साथ-साथ सीएम खट्टर से मुलाकात कर चुका हूं,

उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला

विधानसभा में मुद्दा उठा चुका हूं, संबंधित विभाग के मंत्री तक बात पहुंचा चुका हूं लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सत्ता में रहते हुए भी विपक्ष जैसा माहौल बनाया जा रहा है। बबली ने कहा कि स्थिति बद से बदतर है। सिस्टम में सुधार की जरूर है।

विधायक बोले, क्यों ना तलाशा जाए डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के खिलाफ हो रहे विरोध का कारण

बबली ने कहा कि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला का आज इतना विरोध हो रहा है, उन्हें इसके कारण तलाशने चाहिए। सांसद रहते हुए दुष्यंत चौटाला ने बहुत अच्छा प्लेटफॉर्म तैयार किया लेकिन अब लोकप्रियता रेत की तरह खिसक रही है।


देवेंद्र सिंह बबली टोहाना विधानसभा में भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला को हराकर सत्ता में आए थे। राजनीतिक हल्कों में चर्चा है कि बबली मंत्री पद के लिए पार्टी पर दबाव बना रहे हैं। वहीं चर्चाएं सुभाष बराला को लेकर भी हैं कि पूर्व विधायक उनके कामों में एक बड़ी अड़चन हैं। हालांकि खुलकर एक दूसरे पर बोलने में बबली भी हिचकते हैं और सुभाष बराला भी चुप्पी साधे हुए हैं।

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