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कोरोना वायरस को रोकने के लिए फरीदाबाद स्थित आरसीबी के वैज्ञानिकों ने नई रिसर्च पर कार्य किया शुरू

डॉक्टर अविनाश बजाज की अगुवाई में फरीदाबाद स्थित रीजनल सेंटर फॉर बायोटेकनोलॉजी ( आरसीबी ) के शोधकर्ता की एक टीम ने covid – 19 ट्रांसमिशन को रोकने के लिए इंजीनियर वर्जिन कोटिंग का अध्यन शुरू किया है।
अध्यन का आयोजन ट्रांसलेशन हैल्थ साइंस एंड टेकनोलॉजी इंस्टीट्यूट ( टीएचएसटीआई ) के डॉक्टर मिलन सुरजीत और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली के टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी विभाग के डॉक्टर सम्राट मुखोपाध्याय के सहयोग से किया जा रहा है। रीजनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी ( आरसीबी ), एक “इंस्टीट्यूशन” है। जो युनेस्को के तत्वाधान में भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा स्थापित किया गया है।

डॉक्टर बजाज के ग्रुप में रोगाणुरोधी अणुओं की इंजीनियरिंग में विशेषज्ञ है जो सूक्ष्मजीवों के झिल्ली को चुनिंदा रूप से लक्षित कर सकते है। यहां समूह अणुओं को विकसित करने पर अपनी विशेषज्ञता का विस्तार करेगा जो कोरोना वायरस अणु के झिल्ली को चुनिंदा रूप से लक्षित करेगा। इन अणुओं का उपयोग विभिन्न सतह जैसे गिलास, प्लास्टिक ओर सुती, नायलॉन ओर पॉलिएस्टर की इंजीनियरिंग के लिए किया जायेगा ताकि वायरलाइड कोटिंग प्रदान की जा सके जो वायरल ट्रांसमिशन को बाधित कर सके।

महामारी से लड़ने में मदद करने के अन्य प्रयास में केंद्र में प्रोफेसर टी नायर के नेतृत्व में एक शोध समूह यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि एनएसपी 12 नामक प्रोटीन की गतिविधि को कैसे रोकना है जो आरएनए पर निर्भर है ओर आरएनएसेस गतिविधि के लिए जिम्मेदार है।

इसके अतिरिक्त केंद्र में वैज्ञानिकों का एक समूह डॉ प्रियंका मौर्या के साथ कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए एक अति संवेदनशील एवं विशिष्ट, तीव्र, बिंदु की देखभाल, कम संसाधन आवश्यकता, वर्नमिती ओर लागत प्रभावी प्रशिक्षण विकसित करने के लिए काम कर रहा है। एसएच साइन बायोटेक, एक अन्य जांच पर आधारित आरटी पीसीआर डायग्नोस्टिक किट पर एक तीसरा इनोक्सएक्स के डॉक्टर वर्मा के साथ चौथा पीसीआर आधारित इन – विट्रो डायग्नोस्टिक किट तैयार कर रहे है

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