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गारमेंट के बाद अब दवा उद्योग पर भी कोरोना का कहर

फरीदाबाद जिले में कोरोनावायरस की दस्तक को लगभग 6 महीने होने को है। बावजूद इसके कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे दिन प्रतिदिन बढ़ते आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती का माध्यम बने हुए हैं।

उधर, कोरोना के कारण बाजार से लेकर उद्योगों तक में कई उतार चढ़ाव देखने को मिले। कुछ उद्योग धंधे ठप हो गए तो कई उद्योगपतियों ने होते उद्योगों को बचाने के लिए व्यवसाय में बदलाव कर दिए है।

कोरोना से बचाव के लिए अन्य बीमारियों को किया दरकिनार

कोरोना के कारण बेशक अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। वहीं अन्य बीमारियों का इलाज व ऑपरेशन बंद हो गया। ऐसे में दवाओं की खपत भी कम हो गई। फरीदाबाद में करीब 30 हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। कोरोना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन में बाजार के साथ उद्योगों पर भी वाला लटक गया था।

वहीं कुछ समय बाद अनलॉक की प्रक्रिया में सरकार ने उद्योगों को शांत शुरू करने की अनुमति दी। हाली के आयात और निर्यात पूरी तरह बंद होने के कारण गारमेंट उद्योग ठप हो गए। दवाइयों के आयात-निर्यात को छूट थी, लेकिन उद्योगपति ही नहीं इन उद्योगों में कार्य कर रहे कर्मचारियों के सामने भी बेरोजगार होने का संकट खड़ा हो गया था।

लॉक डउन के बाद ही ठप हो गया एक्सपोर्ट का कारोबार

फरीदाबाद इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रधान और सेक्टर-24 स्थित वमनी ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन बीआर भाटिया ने बताया कि उनका गारमेंट एक्सपर्ट्स का कारोबार है। कंपनी का जापान,
अमेरिका, तंजानिया सहित अफ्रीकी देशों में ज्यादा कारोबार होता है।

24 मार्च से लॉकडाउन के बाद एक्सपोर्ट का कारोबार ठप हो गया। कंपनी में काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारी बेरोजगार होने की कगार पर आ गए। ऐसे में कोविड से बचाव संबंधी उपकरण बनाने शुरू कर दिए। कंपनी ने हजारों पीपी किट बनाकर सरकार को सौंपी।

अन्य बीमारी पर रोक लगने के बाद दवाओं की खपत हुई कम

फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व प्रधान व सेक्टर-20 स्थित साइकोट्रॉपिक्स इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन नवदीप चावला डा उद्योग से जुड़े हुए है। लॉकडाउन असर उनके उद्यम में बने बाली दांव पर भी पड़ा।

इसको मुख्य वजह यह रही कि सरकारी व निजी अस्पतालों में कुल कोरोना के मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया। हड्डी रोग, हृदय रोग व ऑपरेशन पर डॉक्टरों ने रोक लगा दी थी। इससे दवाओं की खपत कम हो गई । शुरुआत में ट्रायल के तौर पर दवाएं निर्यात की गई।

आइए जानते हैं क्या कहते हैं फरीदाबाद के उद्यमी

कोरोना से पहले बाजार अच्छा चल रहा था। लॉकडाउन में कारोबार उप हो गया, अनलॉक की प्रक्रिया में थोड़ी राहत मिली, मगर ग्राहक अभी भी बहुत कम है। दिवाली पर अछा कारोबार होने की उम्मीद है। – मुकेश गर्ग, प्रधान, ओल्ड फरीदाबाद सराफा एसोसिएशन

पत्नी से अब तक के काम में 60 फीसदी की गिरावट आई है। बाजार में केवल 40 फीसदी काम है। लाकडाउन को बुरा सपन समझ कर भूल जन चहिए। अनलक में बाजार एक बार फिर पटरी पर लौटने लग प्रेम र्टर, प्रधान, हरियाणा व्यापार मंडल बल्लभगढ़

लॉकडाउन के बाद चार महीने व्यवस्थित हुए काम को संभालने में लग गए। इस दौरान कंपनियों को करोड़ों रुपये का नुकसान भी झेलना पड़ा। उद्योग जगत को भारी नुकसान हुआ है। कभी ऐसा सोचा नहीं था, मगर अब काम धीरे-ध्रे पटरी पर लौटने लगा है। बाजार में 60 फीसदी काम है। – नरेंद्र अग्रवाल, चेयरमैन, शिवालिक प्रिंट लिमिटेड

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