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हरियाणा के एक्सटेंशन लेक्चरर्स को बड़ा झटका, कोर्ट ने कहा नौकरी चाहिए तो करे यह काम

लेक्चरर्स को गुरु कहे तो कोई आम बात नहीं वह गुरु जैसा दर्जा ही रखते हैं। लेकिन इन गुरुओं को हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए नेट परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक्सटेंशन लेक्चरारों को बड़ा झटका दिया है। उच्च न्यायालय ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर एक्सटेंशन लेक्चरार का कोई अधिकार नहीं है।

कोरोना काल में जिस प्रकार सभी चीज़े बदल रही हैं उसका एक और उदहारण इसे भी कहा जा सकता है। सरकार ने लेक्चरर्स को इसलिए नियुक्त किया है, क्योकि असिस्टेंट प्रोफेसर के पद खाली थे। सरकार ने पॉलिसी बनाते हुए इन पदों पर अब नेट पास होना अनिवार्य कर दिया है।

जिस प्रकार लगातार कोरोना काल में नौकरियां जा रही हैं ठीक उसी प्रकार का उदहारण यह हो गया है। यदि कोई एक्सटेंशन लेक्चरार यह योग्यता पूरी नहीं करते हैं। ऐसे में वह कैसे इन पदों पर योग्य माने जा सकते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार द्वारा इन पदों पर नियुक्ति के बावजूद पद खाली रह गए हैं। ऐसे में उन्हें कार्यरत रहने दिया जाए।

इस समय कॉलेज भले ही बंद हों लेकिन इस फैसले ने बहुत से गुरुओं की नींद उड़ा दी है। सरकार के पास योग्य आवेदकों की कमी है ऐसे में इन पदों पर याचिकाकर्ताओं को ही रहने दिया जाए और नेट की परीक्षा की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। न्यायालय ने कहा कि समय-समय इस विषय में अदालत आदेश देती आई है कि केवल योग्य आवेदकों की ही नियुक्ति हो और यूजीसी के भी यही प्रावधान हैं।  याचिकाकर्ता भले ही एक्सटेंशन लेक्चरार के पद पर कार्यरत रहे हैं, लेकिन इस दौरान भी वे अनिवार्य योग्यता पूरी नहीं कर पाए।

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