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जानिए कैसे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ घर बार छोड़ पहुंचे राजनीति में

पहले एक परिवार का बेटा फिर पहले एक परिवार का बेटा फिर छात्र, फिर महंत, फिर सांसद और फिर सीएम ऐसी है कहानी सीएम योगी आदित्यनाथ की। आप सभी जानते है कि सीएम योगी आदित्यनाथ यूपी में है और यूपी के मुखिया है। इससे पहले वे गोरखपुर से सांसद बनते आ रहे है। इसके बाद उन्हें 2017 में देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की कमान सौपीं गयी। और जब से उन्होंने उत्तर प्रदेश में सूबे की कमान हासिल की है तब से लेकर आज तक उनके नाम की चर्चाएं न सिर्फ पक्ष बल्कि विपक्ष भी करता है।

उनके नाम की चर्चाएं न सिर्फ देश बल्कि विदेश में भी होती हैं। अपने आप में एक अलग ही कलाकृति के बने हुए सीएम योगी आदित्यनाथ अपनी भाषा शैली अपने अनुभव और अपने इर्द गर्द के आवरण अपने आस पास के वातावरण से काफी चर्चाओं में रहते है। जिस तरीके की बातें वो करते आये है हिंदुत्व को लेकर, राम मंदिर को लेकर, अपराधियों को लेकर देश दुनिया को लेकर, महिलाओं के सम्मान को लेकर उन तमाम चीज़ों का जितना बखान किया जाए उतना ही कम है।

आपको बता दे कि सीएम योगी बचपन से ही ऐसी सोच और विचारधारा के थे वो शुरुआत से ही राजनीति में रुचि रखते थे। स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने महज 22 साल की उम्र में अपने घर परिवार का त्याग कर दिया और गोरखपुर के तपस्थली के होकर रह गए। सीएम योगी आदित्यनाथ जब स्कूल में थे, तो लगातार वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेते थे, उन प्रतियोगिताओं में तत्कालीन गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में बुलाए जाते थे। ऐसे ही एक कार्यक्रम में महंत अवैद्यनाथ पहुंचे थे, जहां उन्होंने योगी आदित्यनाथ का भाषण सुना, उस भाषण से अवैद्यनाथ काफी प्रभावित हुए।

इस कार्यक्रम के बाद अवैद्यनाथ ने उन्हें बुलाकर पूछा कि कहां के रहने वाले हो? कहां से आए हो? इसके बाद दोनों के बीच बातचीत हुई और आखिर में अवैद्यनाथ ने आदित्यनाथ को गोरखपुर आने का न्योता दिया। बता दे कि अवैद्यनाथ भी उत्तराखंड के ही रहने वाले थे और उनका गांव भी आदित्यनाथ के गांव से महज 10 किलोमीटर दूर था। खैर, महंत अवैद्यनाथ के न्योते पर योगी आदित्यनाथ गोरखपुर पहुंचे और वहां कुछ दिन रूकने के बाद वापस अपने गांव लौट गए।

इसके बाद उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई के लिए ऋषिकेश के ललित मोहन शर्मा महाविद्यालय में दाखिला लिया, लेकिन उनका मन अब पढ़ाई में नहीं था बल्कि उनका मन अब गोरखपुर की तप स्थली की ओर था। इसी बीच महंत अवैद्यनाथ बीमार पड़ गए और इसकी खबर मिलते ही योगी तुरंत गोरखपुर पहुंच गए। जब योगी आदित्यनाथ गोरखपुर पहुंचे, तो वहां देखा कि महंत काफी बीमार हैं। इसके बाद महंत ने योगी को अपने पास बुलाया और कहा कि हम अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर बनाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं,

मेरी हालत अब काफी बिगड़ रही है और मुझे कुछ हो गया तो मेरे इस मंदिर को देखने के लिए कोई नहीं है। इसके कुछ ही दिनों बाद योगी आदित्यनाथ अपने घर से नौकरी का बहाना कर गोरखपुर की तपस्थली की ओर निकल पड़े और वहां महंत अवैद्यनाथ की शरणों में रहे। इसके बाद उन्हें महंत ने अपना उत्तराधिकारी बनाया और फिर योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के ही होकर रह गए। यहीं से योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक करियर शुरू हुआ।

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