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फरीदाबाद को स्मार्ट सिटी नहीं बनने दे रहा एन.आई.टी क्षेत्र, जानें कैसे

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नये आंकड़े जारी किये हैं। नये आंकड़ों की इस रिपोर्ट में पाया गया है कि शहर में प्रदूषण का स्तर दो गुना बढ़ गया है जो कि अच्छा संकेत नहीं है। पूरे देश में अनलॉक की प्रक्रिया के चलते सभी प्रकार की आवा-जाहि शुरू हो गयी, काम-धंदे शुरू हो गए, फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन ने तेज़ रफ़्तार पकड़ ली। ऐसे में, लॉक-डाउन के चलते पर्यावरण में जितना भी सुधार हुआ था, वो फिर एक बार दुर्गति की ओर अग्रसर हो गया है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी वेबसाइट पर नए आंकड़ों वाली रिपोर्ट अपडेट कि तो पर्यावरण सुधार में जुटे लोगों के पसीने छूट गए। रिपोर्ट के मुताबिक़ 25 मार्च 2020 को वायु की गुणवत्ता का सूचकांक 100 था जो अक्टूबर के महीने की शुरुवात में 182 तक पहुँच गया है। 5 अक्टूबर को वायु गुणवत्ता सूचकांक 182 पाया गया जबकि 2 दिन पहले ये सूचकांक 203 पर पहुंचा हुआ था।

उद्योगिक क्षेत्र और एन.आई.टी में सबसे अधिक प्रदूषण की समस्या

वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या के रूप में उभर कर आ रहा है जिसका जल्द समाधान निकालना बेहद ज़रूरी हो गया है। शहर के वायु प्रदूषण के लिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कुछ इलाकों में मापक यंत्र लगाए हुए हैं। ये इलाके हैं – एन.आई.टी, सेक्टर-11, सेक्टर-16, सेक्टर-30 और ऐसा पाया गया है कि इन इलाकों में ख़ास तौर से वायु की गुणवत्ता बिगड़ती जा रही है।

प्रदूषण को नियंत्रण में करना जितना आवश्यक है उतना ही चनौतीपूर्ण भी। प्रदूषण की मुख्य वजह हैं औद्योगिक इकाईयां। ऐसे में सरकार के लिए प्रदूषण को नियंत्रण में करना आसान नहीं होगा। सरकार के आगे कुछ चुनौतियां भी आएंगी जिनमें से जाम वाले स्थानों पर यातायात को नियंत्रण में करना और सड़कों पर जमी मिट्टी हटाना ज़रूरी है। साथ ही, नगर निगम को कबाड़ जलाने पर तुरंत रोक लगानी चाहिए और जितना हो सके पेड़ लगाने चाहिए। तभी इस समस्या का कुछ ठोस हल निकल पायेगा।

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