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हरियाणा और पंजाब में कृषि बिल के विरोध से रेलवे को भारी नुक्सान, ट्रेन सेवाएं निलंबित

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित कृषि अध्यादेश अब जल्द ही एक्ट बनने वाले हैं। तीनों कृषि बिल लोक सभा और राज्य सभा से पारित होने के बाद, अब लागू होंगे। देश भर में कृषि अध्यादेशों को किसान विरोधी बताते हुए विपक्षी दाल की पार्टियों ने विरोध प्रदर्शन किये। साथ ही, किसान भी इन बिल को लेकर सरकार से रुष्ट नज़र आ रहे हैं। इस लड़ाई में किसान अकेले नहीं हैं। किसान मजदूर संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें सरकारी कर्मचारियों और श्रमिकों के कई तबकों से समर्थन मिल रहा है।

पंजाब और हरियाणा में अभी भी विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा। इतना ही नहीं, पंजाब में तीन कृषि विधेयकों के खिलाफ बृहस्पतिवार से किसानों ने तीन दिवसीय ‘रेल रोको’ प्रदर्शन शुरू किया और इसी के मद्देनज़र फिरोजपुर रेल संभाग ने विशेष ट्रेनों के परिचालन को रोक दिया। रेलवे को भारी नुक्सान उठाना पड़ रहा है। 200 करोड़ रुपये का नुक्सान पहले ही रेलवे को झेलना पड़ चुका है। इतना ही नहीं ,रेल अधिकारियों ने बताया कि रेल यात्राएं कुछ समय के लिए निलंबित रहेंगी।

भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्रहण) के कार्यकर्ता बरनाला और संगरूर में बृहस्पतिवार सुबह रेल पटरियों पर पालथी मारकर बैठ गए। किसान मजदूर संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने अमृतसर के देवीदासपुर और फिरोजपुर के बस्ती टांका वाला में रेल पटरियों पर बैठने का निर्णय लिया है। महामारी के चलते पहले ही रेलवे की स्थिति कुछ ठीक नहीं चल रही थी, और अब जब कुछ चुनिंदा स्पेशल ट्रेनें पटरी पर दौड़ने के लिए तैयार है तो, किसान ‘रेल रोको’ प्रदर्शन पर उतर आये हैं।

अधिकारियों ने बताया कि गोल्डेन टेम्पल मेल (अमृतसर-मुंबई मध्य), जन शताब्दी एक्सप्रेस (हरिद्वार-अमृतसर), नयी दिल्ली-जम्मू तवी, कर्मभूमि (अमृतसर-न्यू जलपाइगुड़ी), सचखंड एक्सप्रेस (नांदेड़-अमृतसर) और शहीद एक्सप्रेस (अमृतसर-जयनगर) निलंबित ट्रेनों की सूची में शामिल हैं। विरोध प्रदर्शन के चलते रेलवे के 200 करोड़ के नुक्सान के साथ, NHAI को भी 11 करोड़ की चोट लग चुकी है।

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