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हो जाइए सावधान, प्रदूषण दे सकता है इन बीमारियों को दस्तक

इस वक्त पूरा विश्व दो जानलेवा संकटो से जूझ रहा है। और वो संकट कहि और नहीं है बल्कि हमारे बिलकुल आस पास है। अब आप सब सोच रहे होंगे की में किस संकट की बात कर रही हुँ। आज में दो संकटो की बात कर रही हूँ। जो हमारे बिलकुल आस पास है। जो बिलकुल हमारी आँखों के सामने है ,लेकिन फिर भी हम उसे देखकर भी अनदेखा कर है। में बात कर हूँ एक वैश्विक महामारी और दूसरी वायु प्रदुषण। वायु प्रदुषण से तो हम पहले से ही जूझ रहे थे लेकिन अब हम एक और संकट से जूझ रहे है और वो है वैश्विक महामारी एक ऐसा बिन बुलाया मेहमान जो हमारे देश में घर कर के बैठ गया है और जाने का नाम नहीं ले रहा है।

प्रदुषण स्तर बढ़ना सभी के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। क्यूंकि इस वक्त देश में केबल एक समस्या नहीं है बल्कि बहुत सारी परेशानियाँ है। अगर लोग यूँ ही इन समस्या को देखकर भी अनदेखा करते रहे है तो वो दिन दूर नहीं जब पुरे विश्व में अकाल की स्थिति पड़ सकती है। आज धरती पर जीवन खतरे में पड़ गया है क्योंकि पर्यावरण इस तरह से प्रदूषित हो गया है कि पृथ्वी के सारे जीव संकट में पड़ गये हैं, हाल ही में वाशिंगटन स्थित वर्ल्ड वाच इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में चेतावनी दी गयी है कि समूचे संसार में अकल्पनीय जीव-नाश शुरू हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार संसार की तीन चौथाई पक्षी विनाश के कगार पर हैं और मेढ़कों की संख्या संसार में लगातार कम हो रही है।

प्रदूषण से वायुमंडल तो बुरी तरह प्रभावित हो ही रहा है, इससे जलवायु और मानव समाज भी प्रभावित हो रहा है। आधुनिक टेक्नोलाॅजी और विकास के परिणामस्वरूप प्रदूषण और इससे सम्बंधित समस्याएं बढ़ी हैं। वनों की कटाई से जीवन के स्तर में बड़ी गिरावट आयी है। इससे वर्षा के क्रम में परिवर्तन हो रहा है और भूमि का विनाशकारी कटाव हो रहा है।ऐसे प्रदूषणों से फेफड़े का कैंसर अस्थमा, श्वसनी शोथ, तपेदिक आदि अनेक बीमारियाँ हो रही है।

दिल्ली का स्थान फेफड़ों की बीमारियों में सबसे ऊपर है। यहाँ की 30 प्रतिशत से अधिक आबादी सांस की बीमारियों से पीड़ित है। नली और गले की बीमारियाँ 12 गुना अधिक हो गयी है । इसका कारण है नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, लेड ऑक्साइड आदि जहरीली गैसें, दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास कुछ क्षेत्रों में कणिकीय पदार्थ (धूल) हवा में 945 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक अधिक हैं। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित मात्रा से 20 गुनी अधिक बतायी जाती है।

महामारी के चलते पहले से ही अस्पतालों में भीड़ लगी हुई थी। लेकिन अब प्रदूषित स्तर भड़ने के कारण लोगो की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। बी के सिविल अस्पताल में मरीजों की संख्या 1200 से बढ़कर 1500 हो गयी है। इससे अंजदाजा लगया जा सकता है की देश में य समस्या कितनी हद तक भड़ चुकी है और आगे भी अगर इस परेशानी पर गम्भीरता से विचार विमर्श नहीं किया तो आगे जाकर यह समस्या विकराल रूप धारण क्र सकती है।

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