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5G की डील में इस भारतीय कम्पनी ने मारी बाजी, चीन में मची खलबली

एशिया का सबसे ताकतवर देश कहा जाने वाला चीन कारोबार और व्यापार में भी पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना चुका था। एक समय वह था जब चीन अपनी 5G कंपनी हुवावे के दम पर दुनिया भर में वायरलेस नेटवर्क का बेताज शहंशाह बनना चाहता था।

किसने ड्रैगन के इरादों पर पानी फेरा ?

चीन से ही पैदा हुए कोरोना वायरस ने ही चीन के इस बड़े सपने पर पानी फेर दिया। इसका एकमात्र कारण यह है कि चीन की वजह से पैदा हुए कोरोना वायरस ने अन्य देशों की आर्थिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया इसी के साथ साथ लाखों की मौत का जिम्मेदार भी चीन ही है। दुनिया को इस बात का एहसास हो चुका है कि चीन पर विश्वास करना मतलब अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना है । इसी खतरे को भागते हुए अब भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी एयरटेल ने भी भारत के बाजार से Huawei को बाहर का रास्ता दिखाने का आदेश भी दे दिया है।

फिर कैसे आएगा इंडिया में 5g ?

चीन के साथ 5जी की डील करने से हिंदुस्तान ने मना तो कर दिया लेकिन अब सवाल यह उठता है कि 5G को इंडिया में कैसे लाया जाए इसलिए एयरटेल ने नोकिया के साथ 1 बिलियन यूएस डॉलर की 5G डील को पक्का कर लिया।

अब कोरोना काल के बाद सब कुछ बदलने ही वाला है तो एयरटेल ने हुवावे के साथ दाम को renegotiate करने का फैसला भी कर लिया है। इसका मतलब अब Huawei को पहले के मुकाबले बेहद कम कीमत पर ही अपनी सेवाएं देने को कहा जाएगा ।

एयरटेल द्वारा चीन की कंपनी Huawei के साथ बड़ी डील कैंसिल होने के बाद पहले ही दबाव बढ़ गया होगा जिसका एयरटेल भरपूर फायदा उठाना चाहता है ऐसे में अगर हुवावे कम कीमत पर अपनी सेवाएं देने से इनकार करता है तो वह अपने आप ही भारतीय बाजार से बाहर हो जाएगा और इस कार्य को करने के लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी होगी।
यदि देखा जाए Huawei अब तक 5G किससे आधुनिक कंपनी मानी जाती थी लेकिन जिस प्रकार चीन की सरकार ने करोना के समय बर्ताव किया है उसका खामियाजा अब इस कंपनी को भुगतना पड़ सकता है।

कुछ बाते भारत की ।

भारत पूरी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा टेलीकॉम बाजार है भारत में 2025 तक 92 करोड मोबाइल उपभोक्ता होने का अनुमान है और माना जा रहा है कि उस वक्त देश में आठ से नौ करोड़ 5G उपभोक्ता हो जाएंगे यानी 5 जी कंपनी के लिए यह एक बेहतरीन मौका है जो इस पर चौका लगा गया समझो टेलीकॉम का बादशाह बन गया। लेकिन अब चीन की हुवावे कंपनी को यह मौका मिलने से रहा।

हुवावे 5G की तकनीक को पूरी दुनिया में प्रसार करने पर काम कर रहा है लेकिन अमेरिका कनाडा जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने इस कंपनी पर इन देशों की सुरक्षा से समझौता करने और चीनी सेना के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है इन देशों का मानना है कि हुआवेई कंपनी चीनी सरकार के प्रभाव में काम करती है और सुरक्षा के लिहाजे से इन देशों के लिए खतरा साबित हो सकती है

चीन की इस कंपनी को uk में पहले ही झटका लग चुका है। क्योंकि चीन से बुरी तरह चिड़े हुए प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अपने यहां 5G सेवाएं शुरू करने से संबंधित हुवावे को दी गई सभी अनुमति वापस लेने का ऐलान कर दिया है।
केवल यही नहीं ब्रिटिश सांसद यूके के इंफ्रास्ट्रक्चर में चीन की किसी भी कंपनी के शामिल होने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात भी चल रही है। यदि अमेरिका की बात करें तो ट्रंप प्रशासन शुरू से ही चीन के खिलाफ कड़े कदम लेता आया है ।

चीन ने दी धमकी , भारत ने दिया करार जवाब ।

भारत देश में भी हुआ वह पर प्रतिबंध लगाने की बात समय-समय पर उठती रहती है हालांकि उसके बाद पिछले वर्ष अगस्त में चीन ने हुवावे को लेकर भारत को धमकी विधि और चीन ने कहा था “अगर Huwaei पर भारत में व्यापार करने पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो चीन अपने यहां कारोबार करने वाली भारतीय फार्म पर प्रतिबंध लगाने के लिए स्वतंत्र होगा “।
इसके बाद भारत ने चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया था और कहा ” अगर चीन अपनी चिंताओं को कूटनीतिक माध्यम से भारत सरकार तक पहुंचाता तो अच्छा रहता है चीन द्वारा खुले तौर पर भारत को धमकी देने की वजह से अब सरकार के रुख में बदलाव आएगा और Huawei को इसका नुकसान उठाना भी पड़ सकता है।”

अंततः कोरोना वायरस की वजह से कई देशों ने चीन के साथ व्यापार और कारोबार करने के लिए भी विचार विमर्श करना शुरू कर दिया है क्योंकि चीन की इस लापरवाही के बाद अब कोई भी देश अपने आपको खतरे में नहीं डालेगा और क्योंकि भारत की सभी टेलीकॉम कंपनियों ने Huawei को ठिकाने लगाने का प्लान बना ही लिया है तो भारत में तो चीन के इस बड़ी कंपनी की कहानी खत्म ही समझो।

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