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निकिता मर्डर केस में एसआईटी ने हासिल की बढ़ी कामियाबी,जानिए क्या है 700 पेज की चार्जशीट में

एसआईटी के द्वारा की गई दिन-रात की मेहनत एवं उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में एक रिकॉर्ड समय ( मात्र 11 दिन) में चार्जशीट को तैयार किया।

चार्जशीट को डिजिटल, फोरेंसिक एवं मेटेरियल एविडेंस के आधार पर अनुभवी अनुसंधान अधिकारियों द्वारा तैयार किया गया जिसका पुलिस आयुक्त महोदय श्री ओपी सिहं द्वारा बारीकी से अवलोकन किया गया एवं वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों द्वारा केस के हर लीगल पहलूओ की गहराई से स्क्रुटनी की गई।

डिजिटल एवं फॉरेंसिक साइंस एविडेंस और चश्मदीद गवाह व अन्य पुख्ता सबूत के आधार पर आरोपियों को शीघ्र दिलवाई जाएगी कड़ी सजा।

आपको बता दें कि 26 अक्टूबर को पेपर देकर अपनी सहेली के साथ घर लौट रही छात्रा निकिता को अग्रवाल कॉलेज के गेट के बाहर मुख्य आरोपी तौसीफ ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस वारदात को अंजाम देने में उसका साथी रेहान भी शामिल था। दोनो आरोपी वारदात को अंजाम देकर कार से फरार हो गए थे।

घटना की सूचना मिलने पर थाना शहर बल्लभगढ़ में हत्या व आर्म्स एक्ट की धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया था।

पुलिस आयुक्त महोदय के संज्ञान में आने पर उन्होंने तुरंत एसीपी क्राइम अनिल यादव के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की 10 टीमें आरोपियों की धरपकड़ में लगाई गई और स्वयं मॉनिटरिंग करते रहे।

मात्र 5 घंटे में क्राइम ब्रांच ने गोली मारने वाले मुख्य आरोपी तौसीफ को नुहं से गिरफ़्तार किया।

पुलिस आयुक्त महोदय श्री ओपी सिंह ने वारदात की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एसपी क्राइम श्री अनील यादव के नेतृत्व में क्राइम ब्राचं DLF प्रभारी अनिल कुमार सहित अनुभवी अनुसंधान अधिकारियों को शामिल कर एक एसआईटी का गठन किया गया।

दूसरे आरोपी रेहान को भी नूहं से गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही आरोपियों को हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए देसी कट्टा उपलब्ध कराने वाले तीसरे आरोपी अजरू को भी नुहं से गिरफ्तार किया गया व वारदात में प्रयोग गाड़ी को भी बरामद किया गया।

पुलिस आयुक्त महोदय स्वयं केस की हर वक्त प्रगति रिपोर्ट ले रहे थे और उनके मार्गदर्शन में एसआईटी ने दिन रात काम करके एक रिकॉर्ड समय में केस से संबंधित डिजिटल, फॉरेंसिक व मटेरियल सबूतों और गवाहों के आधार पर चार्जशीट तैयार की जिसकी पुलिस के उच्च अधिकारियों सहित कानून विशेषज्ञों द्वारा बारीकी से scrutiny की गई।

एसआईटी निरंतर अनुसंधान कार्य में जुटी रही और केस की कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए हर सबूत को इकट्ठा करती रही ताकि आरोपियों को सख्त सजा दिलाई जा सके।

पुलिस आयुक्त महोदय के द्वारा नितिका के भाई और मामा को आर्म्स लाइसेंस दिया गया इसके साथ ही परिवार के प्रत्येक सदस्य को गनमैन दिया गया है। इस केस की आई विटनेस के पिता को भी गन का लाइसेंस दिया गया है। ताकि वो सभी निर्भय होकर अपने केस की पैरवी करें सके। फरीदाबाद पुलिस हर वक्त पीड़ित परिवार के साथ है।

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