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पंजाब हरियाणा सरकार पर चला केजरीवाल का जादू, बात मानी तो खत्म हो जाएगा पराली का प्रदूषण

बढ़ता प्रदूषण राज्य सरकारों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। काफी मशक्कत और योजनाओं के बाद भी प्रदूषण को नियंत्रण में करना अत्यंत मुश्किल हो गया है। दिल्ली एनसीआर में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण ने न सिर्फ सरकार की बल्कि लोगों की भी मुश्किल है बढ़ा दी है। वायु प्रदूषण जिस तेज रफ्तार से बढ़ रहा है उससे वायु की गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है।

एक ओर वायु प्रदूषण के चलते सांस के रोगियों हृदय रोगियों और सांस संबंधी तकलीफ के मरीजों में इजाफा हो रहा है। वहीं दूसरी ओर बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं और शिशुओं की सेहत पर इसका दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है। सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुझाव के मुताबिक प्रदूषण नियंत्रण के लिए टीमों का भी गठन किया था जो प्रदूषण के कारणों की स्टडी कर उन पर नजर नजर बनाए हुई थी।

इस योजना से भी कोई खास फायदा सरकार को नहीं देखने को मिला है इस बीच पराली जलाने से हर साल हवा में घुलने वाले जहर की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार पहले ही काम कर रही है जिसमें किसानों को छिड़काव करने और पराली को खाद में तब्दील करने के उपायों से जागरूक किया जा रहा है। दिल्ली में किसानों ने पूसा डीकंपोजर का ट्रायल शुरू कर दिया है जिसके बेहद सकारात्मक नतीजे देखने को मिल रहे हैं।

पूसा के वैज्ञानिकों की माने तो डीकंपोजर कैप्सूल को गुड़ और बेसन के साथ बोलकर खेतों में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी 4 कैप्सूल से कोई 25 लीटर घोल तैयार किया जा सकता है जो एक हेक्टर तक जमीन के लिए पर्याप्त है। खेतों में इसका छिड़काव करने से कुछ ही दिनों में पराली खाद में तब्दील हो जाती है।

इस फार्मूले का फायदा दिल्ली के किसान भरपूर तरीके से उठा रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्था (IARI) को पूसा इंस्टिट्यूट के नाम से भी जाना जाता है। जिसने इस फार्मूले की भूरी भूरी प्रशंसा की है। ऐसे में देश की राजधानी दिल्ली से लगते पंजाब और हरियाणा की सरकारों ने अगर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का यह फार्मूला मान लिया तो अगले साल से पंजाब हरियाणा समेत दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण काफी कम हो जाएगा।

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