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13 दिन की बच्ची की मौत के मामले ने लिया नया मोड़ ,जाने क्या होगा आगे…

कहा जाता है की अगर किसी बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित जगह होती है तो वह है उसकी माँ का आंचल और बाप का साया ,वेद पुराणों में भी माँ बाप को सबसे उच्च स्थान प्राप्त हुआ है।लेकिन समस्या तो तब खड़ी होती है जब भगवान का दर्जा दिए जाने वाले माँ बाप ही अपने बच्चे के लिए हैवान बन जाये।

ऐसा ही मामला सेक्टर-58 थाना क्षेत्र के गांव करनेरा से आया है ,जिसमे 21 अक्टूबर को 13 दिन की नवजात बच्ची की गल्ला घोंटकर हत्या कर दी गयी ,मामले का आरोपी उसके माँ बाप को बताया जा रहा है हलाकि अभी इस बात की पूर्ण रूप से पुष्टि नहीं हुई की आखिरकार बच्ची की मौत का कारण माँ है या बाप ।

सेक्टर-58 थाना क्षेत्र के गांव करनेरा में 21 अक्टूबर को नवजात बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला पुलिस के लिए भी पेचीदा हो गया है। बच्ची की पोस्टमार्टम रिपाेर्ट से साफ हो गया था कि उसकी मौत गला दबाने से हुई है।अब परेशानी ये है कि माता-पिता एक दूसरे पर बच्ची की हत्या का आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने दोनों में से किसी को गिरफ्तार नहीं किया है। पुलिस अब दोनों का पालीग्राफी टेस्ट कराएगी। इसकी मंजूरी के लिए थाना पुलिस दो दिन में इलाका मजिस्ट्रेट के पास अनुमति की अर्जी लगाएगी। पुलिस का कहना है कि पालीग्राफी टेस्ट से सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। इसके बाद ही पुलिस गिरफ्तारी को लेकर कोई निर्णय लेगी।

गांव करनेरा निवासी धर्मेंद्र ने पुलिस को बताया था कि करीब 14 महीने पहले पलवल निवासी बिमलेश के साथ उनकी शादी हुई थी। 9 अक्टूबर को बिमलेश ने बेटी को जन्म दिया। नवरात्र के महीने में बेटी का जन्म होने से धर्मेंद्र बेहद खुश थे। उन्हें लगा कि घर में लक्ष्मी आई है। धर्मेंद्र का कहना है कि बेटी के जन्म से उनकी पत्नी जरा भी खुश नहीं थी। वह पहली संतान के रूप में बेटा चाहती थी। धर्मेंद्र का आरोप है कि बेटी की लालसा में उसकी पत्नी ने बेटी का ध्यान रखना बंद कर दिया। वह उसे दूध भी नहीं पिलाती थी। 22 अक्टूबर की सुबह बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। धर्मेंद्र ने पुलिस काे शिकायत देकर अपनी पत्नी पर गला दबाकर बेटी की हत्या का आरोप लगाया था।

माता पिता का एक दूसरे पर आरोप लगाने से मामला और भी पेचीदा हो गया है। सेक्टर-58 थाना प्रभारी भीमसिंह का कहना है कि अब मामला बेटी की हत्या से जुड़ा है, इसलिए बहुत सोच-समझकर कदम उठाना पड़ रहा है। माता-पिता का पालीग्राफी टेस्ट कराने का निर्णय लिया है।

क्या है पॉलीग्राफी टेस्ट
आपको बता दे की पालीग्राफी टेस्ट तब करया जाता है जब किसी के झूठ और सच का पता लगाना हो। इस टेस्ट को बिना परमिशन के नहीं किया जाता। पॉलीग्राफी टेस्ट बड़े बड़े मामलो में ही करवाया जाता है इसमें आरुषि हत्याकांड जैसे चर्चित केस शामिल किया गया था। पॉलीग्राफ टेस्ट को लाई डिटेक्टर या झूठ पकड़ने की मशीन के नाम से भी जाना जाता है। इसका आविष्कार1921 में जॉन ऑगस्टस लार्सन ने की थी।

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