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5वीं पास यह व्यक्ति आज के समय में उठाते हैं 21 करोड़ रूपए की सैलरी

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दुनिया में पैसा कमाना जितना कठिन काम है उतना ही सरल भी है। दुनिया के सफल और नामचीन लोगों ने अपने इरादे और मेहनत से कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं। एक ऐसे व्यक्ति जिनकी संघर्ष की कहानी अपने आप बिल्कुल अलग है। जिन्होंने जमीनी स्तर से उठकर बड़ा नाम हासिल किया है। हम जिनकी बात कर रहे है वो वह मसालों की दुनिया के बेताज बादशाह हैं। हम बात कर रहे हैं एमडीएच मसाला कंपनी के मालिक महाशय धर्मपाल की।

इनका जन्म 27 मार्च 1927 को सियालकोट में हुआ था। 1933 में इन्होंने पांचवी कक्षा की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। 1937 में महाशय जी ने पिता की मदद से शीशे का छोटा सा बिजनेस शुरु किया। उसके बाद साबुन और दूसरे कई बिजनेस किए लेकिन उनका मन नहीं लगा। बाद में उन्होंने मसालों का कारोबार शुरू किया, जो उनका पुश्तैनी कारोबार था।

5वीं पास यह व्यक्ति आज के समय में उठाते हैं 21 करोड़ रूपए की सैलरी

आपको बता दे कि जब साल 1947 देश का बंटवारा हुआ तो धरमपाल गुलाटी का परिवारी पाकिस्तान में अपना सबकुछ छोड़ कर दिल्ली चले आये और यहाँ कैंट में अपने परिवार के साथ रिफ्यूजी कैम्प में रहे।

गुलाटी जी जीवन में ना जाने कितने उतार-चढ़ाव देखे लेकिन कभी ये परिस्थितियों से हार नहीं मानते हुए, कुछ पाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखा और सफलता की राह पर लगातार आगे बढ़ते चले गये। बताते चले कि पिताजी महाशय चुन्नीलाल की सियालकोट में ही MDH नाम से मिर्च-मसालों की बहुत प्रसिद्ध दुकान थी जिसकी स्थापना उनके पिताजी ने वर्ष 1919 में की थी।

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उनके पिता अपने हाथो से ही मिर्च-मसाले बनाते थे जिसके कारण पूरे उस क्षेत्र में उन्हें ‘दिग्गी मिर्च वाले’ के नाम से जाना जाता था।

वहीं धर्मपाल गुलाटी ने आख़िरकार अपना खानदानी मसालों का कार्य फिर से दिल्ली में शुरू करने का मन बना लिया और अपना तांगा और घोड़ा बेचकर अजमल खान रोड, करोल बाग़ में एक लकड़ी का खोका खरीद कर छोटी सी दुकान Mahashian Di Hatti Siyalkot वालो के नाम से शरू कर दी।

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उन्होंने यहाँ रात-दिन एक करके मसाला कूटने और मिर्च पीसने का कार्य शुरू किया और उनकी मेहनत रंग लाने लगी।

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