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किसान आंदोलन की तर्ज पर रोडवेज को रोज झेलना पड़ रहा है लाखों का घाटा

किसान आंदोलन ने इस समय पूरे देश में त्राहिमाम मचाया हुआ है। हर कोई किसानों के साथ खड़ा हुआ नजर आ है। सरकार द्वारा पारित किए जाने वाले तीन कृषि अध्यादेशों की किसान समुदाय जमकर अवहेलना कर रहा है।

आपको बता दें कि किसान आंदोलन में किसानों के साथ तमाम रंगकर्मी भी खड़े हो चुके हैं। पर बात की जाए इस आंदोलन से होने वाले घाटे की तो इस मुहीम ने हरियाणा रोडवेज के मुँह पर कसकर तमाचा मारा है। किसान आंदोलन के चलते हरियाणा रोडवेज का दायरा नफा से बहुत दूर हो चुका है।

किसान आंदोलन की तर्ज पर रोडवेज को रोज झेलना पड़ रहा है लाखों का घाटा
किसान आंदोलन की तर्ज पर रोडवेज को रोज झेलना पड़ रहा है लाखों का घाटा

आए दिन रोडवेज को लाखों का नुक्सान झेलना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि कई इलाके ऐसे हैं जहां पर बस सेवा नहीं उपलब्ध हो पा रही है जिसके चलते रोडवेज को रोज घाटा उठाना पड़ रहा है। पलवल से दिल्ली-चंडीगढ़ तक परिवहन सेवा पर विराम लगाया जा चुका है जिसकी तर्ज पर रोडवेज को भारी नुक्सान उठाना पड़ रहा है।

किसान आंदोलन की तर्ज पर रोडवेज को रोज झेलना पड़ रहा है लाखों का घाटा
किसान आंदोलन की तर्ज पर रोडवेज को रोज झेलना पड़ रहा है लाखों का घाटा

क्रमांक की बात की जाए तो रोज रोडवेज को डेढ़ लाख रूपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। आपको बता दें कि पलवल से दिल्ली चंडीगढ़ तक जाने वाली तमाम बसों की सुविधा को रोक दिया गया है। आंदोलन को उग्र होता देख कार्य प्रणाली द्वारा यह कदम उठाया गया है।

किसान आंदोलन की तर्ज पर रोडवेज को रोज झेलना पड़ रहा है लाखों का घाटा
किसान आंदोलन की तर्ज पर रोडवेज को रोज झेलना पड़ रहा है लाखों का घाटा

26 नवंबर से अब तक 10 बसों का चक्का जाम है और लोगों के मन में भी जाम में फंसने का डर बना हुआ है। बता दें कि रविवार को अन्य दिनों के मुकाबले 40 फीसद तक जाम नियंत्रण में रहा। बस अड्डे के डीआई ने बताया कि चडीगढ़, कैथल, यमुना नगर, जींद, हरिद्वार आदि रूटों पर चलने वाली 10 बसों की सेवा को रोक दिया गया है जिसके चलते रोडवेज को आए दिन नुक्सान झेलना पड़ रहा है।

किसान आंदोलन की तर्ज पर रोडवेज को रोज झेलना पड़ रहा है लाखों का घाटा
किसान आंदोलन की तर्ज पर रोडवेज को रोज झेलना पड़ रहा है लाखों का घाटा

आपको बता दें कि हरियाणा रोडवेज की स्तिथि पहले से ही काफी खराब रही है जिसके चलते सरकारी महकमे को काफी घाटा झेलना पड़ा था। अब किसान आंदोलन के चलते आए दिन हो रहे लाखों के नुक्सान से उभरने के लिए परिवहन प्रणाली को काफी मशक्क्त करनी पड़ेगी।

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